देश की खबरें | पंचायती राज राज्य मंत्री ने ग्राम विकास मूल्यांकन के लिए ‘पंचायत विकास सूचकांक’ जारी किया

नयी दिल्ली, 28 जून केंद्रीय पंचायती राज राज्य मंत्री कपिल मोरेश्वर पाटिल ने बुधवार को कहा कि गांवों में लक्षित विकास के लिए विभिन्न संकेतकों का मूल्यांकन करने के लिहाज से केंद्र सरकार ने ‘पंचायत विकास सूचकांक’ (पीडीआई) तैयार किया है।

सूचकांक पंचायत स्तर पर विकास को मापने और निगरानी करने के लिए एक सांख्यिकीय उपकरण की तरह काम करेगा। प्रायोगिक आधार पर, इसके तहत महाराष्ट्र के चार जिलों - पुणे, सांगली, सतारा और सोलापुर के आंकड़ों का संकलन किया गया।

पाटिल ने इस अवसर पर पंचायती राज सचिव सुनील कुमार और अन्य सरकारी अधिकारियों के साथ पंचायती विकास सूचकांक समिति की एक रिपोर्ट का विमोचन किया जो सतत विकास लक्ष्यों के स्थानीयकरण के साथ आगे का मार्ग दिखाएगी।

पाटिल ने कहा, ‘‘यह बड़ी उपलब्धि है। कई बार सरपंच को भी यह पता नहीं होता कि विकास के मामले में वे कहां खड़े हैं। महाराष्ट्र के चार जिलों में पायलट परियोजना चलाई गयी। अब उन्हें पता होगा कि वे कहां पिछड़ रहे हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘इससे भविष्य की रूपरेखा तैयार करने में भी मदद मिलेगी। इसमें स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार और पानी समेत नौ थीम हैं जिन्हें संयुक्त राष्ट्र ने सतत विकास लक्ष्यों के भाग के रूप में चिह्नित किया है। पंचायत विकास सूचकांक पता चलने के बाद हम ऐसे गांव बनाने में सक्षम होंगे जहां शहरों की तरह सभी सुविधाएं हों।’’

पंचायती राज सचिव कुमार ने कहा कि पीडीआई से पंचायतों की प्रगति पर निगरानी कर आकलन किया जाएगा और उन्हें ग्रेड दिया जाएगा।

उन्होंने कहा, ‘‘पीडीआई पिछले 10 साल के प्रयासों का तार्किक परिणाम है। यह बताएगा कि विकास के लिए खर्च पैसे का क्या हुआ, इसके क्या परिणाम हुए और किस पर ध्यान देना होगा।’’

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