केदारनाथ , 18 अक्टूबर रात भर ट्रेन का सफर, आठ घंटे कार से पहाड़ों का सफर और फिर करीब आठ मिनट हेलिकॉप्टर का सफर तय करके हम पहुंचे थे केदारनाथ । इन्हीं पहाड़ों पर मंगलवार को हेलिकॉप्टर हादसे में सात लोगों के मारे जाने की खबर ने हाल ही में हुई मेरी यात्रा की यादें ताजा करा दी और सब कुछ तस्वीर की तरह सामने से घूम गया और लगा कि यह हादसा शायद हमारे साथ भी हो सकता था।
खूबसूरत नीले आसमान को चीरते हुए बर्फ से ढके पहाड़ों के बीच से छोटे से हेलिकॉप्टर से ही हम लोग फाटा से केदारनाथ पहुंचे थे । भगवान शिव के ज्योतिर्लिंग के दर्शन के साथ दुर्गम यात्रा के रोमांच को अनुभव करने की ललक बरसों से थी, जो हमें यहां खींच लाई थी और शायद उन यात्रियों को भी जो आज दुर्घटना का शिकार हुए।
आठ मिनट की हेलिकॉप्टर यात्रा ने हमें अहसास दिलाया कि प्रकृति के आगे हम कितने बौने हैं । हर पल रोंगटे खड़े कर देने वाला था और ज्यों ही हेलिकॉप्टर घूमता , हमारी सांसे थम जाती। इससे पहले हेलिपैड पर सुरक्षा के न्यूनतम इंतजामात देखकर डर और बढ गया था।
आठ घंटे के इंतजार के बाद हेलिकॉप्टर में चढने का मौका मिला । भारी भीड़ के बीच बेस हेलिपैड पर सामान का वजन भी नहीं जांचा गया, जबकि टिकट पर साफ लिखा था कि दो किलोग्राम से ज्यादा प्रति सवारी ले जाने की अनुमति नहीं है । यात्री बड़े बड़े बैग लेकर भी नजर आये ।
कोरोना प्रतिबंध हटने के बाद इस साल यात्रा को लेकर इतना उत्साह था कि ऑनलाइन हेलिकॉप्टर टिकट खुलते ही मिनटों में बिक गए। गुप्तकाशी, फाटा और सेरसी से केदारनाथ जाने के लिये आधा दर्जन से अधिक हेलिकॉप्टर सेवाप्रदाता हैं। फाटा से केदारनाथ तक एक तरफ का हेलिकॉप्टर किराया 2360 और रिटर्न टिकट 4720 रूपये का है। वहीं सिरसी से 2340 और 4680 और गुप्तकाशी से 3875 और 7750 रुपये प्रति व्यक्ति टिकट है ।
गोरखपुर से आये सत्येंद्र दुबे को फाटा पर चार दिन इंतजार करना पड़ा, जिसके बाद उन्हें टिकट मिले। वह सुबह चार बजे आकर कतार में लग जाते, जबकि काउंटर सात बजे खुलता है। लेकिन उनके आने से पहले करीब सौ लोग कतार में पहले से थे ।
दुबे ने कहा ,‘‘ तीन दिन के बाद हमें टिकट मिले । अब हम हेलिकॉप्टर में चढने के लिये इंतजार कर रहे हैं ।’’
इतनी कठिनाइयों के बावजूद केदारनाथ के दर्शन करने की तीव्र उत्कंठा और भक्तिभाव ने श्रद्धालुओं के चेहरों पर शिकन नहीं आने दी ।
हमने दिल्ली से हरिद्वार की ट्रेन ली और वहां से गुप्तकाशी के लिये कार से रवाना हुए । वहां से अगर हेलिकॉप्टर के टिकट नहीं हैं, तो गौरीकुंड से दस से 15 घंटे की दुर्गम चढाई करनी होती है। पैदल नहीं जा पाने वाले यात्री खच्चर या पालकी से जा सकते हैं ।
हम लोग करीब नौ घंटे पैदल चलकर नीचे उतरे और संकरे, पथरीले रास्ते पर खच्चरों के आतंक से बचते बचाते किसी तरह पहुंचे। रास्ते की खूबसूरती निहारने से अधिक चिंता बेलगाम खच्चरों से खुद को बचाने की थी ।
बद्रीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति के आंकड़ों के अनुसार 2018 में केदारनाथ में 7,32,241 , 2019 में 10,00,021, 2020 में 1,34,881 और 2021 में 2,42,712 यात्री पहुंचे । इस साल आंकड़ा 14 लाख पार कर चुका है, जो नया रिकॉर्ड है।
साल 2013 में भीषण बाढ़ झेल चुके आठवीं सदी के केदारनाथ मंदिर का जीर्णोद्धार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ‘ड्रीम प्रोजेक्ट’ है ।
हेलिकॉप्टर हादसे में मारे में लोगों को मेरी श्रृद्धांजलि। सोशल मीडिया और टीवी चैनलों पर लगातार आ रही फुटेज ने हमारी साहसिक तीर्थयात्रा की यादें ताजा करा दी और यह अहसास दिलाया कि हम कितने भाग्यशाली हैं।
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