देश की खबरें | वकील एवं पीएसी विवाद में मुकदमा झेल रहे चार पुलिस अधिकारियों को उच्‍च न्‍यायालय ने दी राहत

लखनऊ, 23 अगस्‍त इलाहाबाद उच्‍च न्‍यायालय की लखनऊ खंडपीठ ने प्रतापगढ़ में 2014 में हुए वकील एवं पीएसी विवाद में आठ साल से मुकदमें का सामना कर रहे चार पुलिस अधिकारियों को राहत देते हुए बिना अभियोजन स्वीकृति के उन पर चलाये जा रहे मुकदमें को खारिज कर दिया है ।

अदालत ने कहा कि पुलिस अधिकारी मौके पर कानून व्यवस्था के लिए मौजूद थे, और इस कार्य में यदि कुछ वकीलों को चोट आ गयी तो यह नहीं कहा जा सकता है कि पुलिस वाले सरकारी कार्य नही कर रहे थे ।

अदालत ने कहा कि बिना अभियेाजन स्वीकृति के उन पर चलाये जा रहे मुकदमें का प्रभाव शून्य है।

न्‍यायमूर्ति दिनेश कुमार सिंह की एकल पीठ ने अजीत शुक्‍ला व अन्य पुलिस अधिकारियों की ओर से दायर याचिका को मंजूर करते हुए यह आदेश पारित किया।

दरअसल 21 मई 2014 को किसी बात को लेकर प्रतापगढ़ जिला कचहरी में वकीलों एवं पीएसी के लोगों के बीच झगड़ा होने लगा ।

मामला अधिक न बढ़े इसके लिए मौके पर क्षेत्राधिकारी, एसएचओ और चौकी इंचार्ज के साथ साथ अन्य पुलिसकर्मी पहंच गये और बल प्रयेाग करके मामले को शांत कराया था।

बाद में वकीलों ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में पुलिस के खिलाफ अपराधिक परिवाद दायर कर दिया जिस पर अदालत ने 12 जनवरी 2015 को पुलिस क्षेत्राधिकारी, थाना प्रभारी और चौकी इंचार्ज के साथ साथ एक अपर पुलिस अधीक्षक को विचारण के लिए तलब कर लिया।

इस आदेश के खिलाफ दाखिल रिवीजन भी सत्र न्यायालय ने 19 अगस्त 2017 को खारिज कर दिया। इन आदेशों को पुलिस अधिकारियों ने उच्‍च न्‍यायलय में 2017 में ही चुनौती दी थी ।

निचली अदालतों के दोनों आदेशों को खारिज करते हुए उच्‍च न्‍यायालय ने कहा कि मौके पर माहौल काफी खराब था जिसे नियत्रंण में करने के लिए याचीगण मौके पर पहुंचे थे और इस घटना में उन्हें स्वयं भी चोट लगी थी ।

अदालत ने कहा कि उनका यह कृत्य सरकारी कर्तव्य के निर्वहन के दौरान किया गया था, अतः बिना अभियोजन स्वीकृति के उन पर मुकदमा नहीं चलाया जा सकता था।

सं जफर

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