अनाया की रिश्तेदार बेलिंडा हेनरी ने बताया कि प्रतिष्ठित लेखक की लंबी बीमारी के बाद उनके न्यू मेक्सिको के अलबुकर्की स्थित निवास पर रविवार को निधन हो गया।
साहित्य क्षेत्र के समालोचकों का कहना है कि द्वितीय विश्वयुद्ध काल के अनाया के उपन्यास ने अपनी कल्पना एवं सांस्कृतिक संदर्भों से लातीनी लेखकों की एक पूरी पीढ़ी को प्रभावित किया जो 1972 में इसके प्रकाशन के समय दुर्लभ थे।
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यह उपन्यास एक युवा मेक्सिकी-अमेरिकी लड़के के बुजुर्ग चिकित्सक के साथ रिश्ते के बारे में है।
सी-स्पैन को 2012 में दिए गए एक साक्षात्कार में अनाया ने कहा था कि उपन्यास का विचार उन्हें उस कमरे के दरवाजे के पास खड़ी एक महिला को देखकर आया था जहां वह कुछ लिख रहे थे।
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अनाया ने कहा था कि, “उस महिला ने कहा कि आप जबतक मुझे इसमें शामिल नहीं करेंगे तब तक आप कहानी नहीं लिख पाएंगे।”
उन्होंने कहा, “मैंने पूछा, तुम कौन? तो उसने कहा कि ‘अल्टीमा’ और बस यहीं से मेरे मन में विचार आया।”
किताब का विमोचन बढ़ते और उग्र चिकानो (मेक्सिको मूल का व्यक्ति) आंदोलन के समय हुआ था जिसने समावेशन के ऊपर सांस्कृतिक गौरव को बल दिया। साथ ही यह ऐसे समय आया था जब कॉलेजों के मेक्सिकी-अमेरिकी विद्यार्थी लातीनी लेखकों से और साहित्य की मांग कर रहे थे।
एपी
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