देश की खबरें | सुल्तान पैलेस का हश्र पटना कलेक्टरेट जैसा नहीं होना चाहिए : विरासत प्रेमी

(कुणाल दत्त)

नयी दिल्ली/पटना, 26 सितंबर बिहार से लेकर पश्चिम बंगाल तक विरासत प्रेमियों ने पांच सितारा होटल बनाने के लिए ऐतिहासिक सुल्तान पैलेस को ध्वस्त करने के बिहार सरकार के प्रस्ताव पर फिलहाल रोक लगाने के पटना उच्च न्यायालय के निर्णय का स्वागत किया है। और साथ ही यह सुनिश्चित करने के लिए विरासत प्रेमियों से एकजुट होने का आह्वान किया है कि सौ साल पुराने सुल्तान पैलेस का हश्र पटना समाहरणालय जैसा नहीं होना चाहिए।

पटना समाहरणालय परिसर में स्थित कई विरासत इमारतों को एक पुनर्विकास परियोजना के लिए पिछले कुछ महीनों में गिराया जा चुका है जिसके कुछ हिस्सों को डच काल में बनाया गया था।

अदालत ने 100 वर्ष पुराने सुल्तान पैलेस को ध्वस्त किए जाने पर फिलहाल रोक लगाते हुए इस संबंध में राज्य सरकार से जवाब भी मांगा है।

इतिहासकार, विद्वान, वकील, वास्तुकार, संरक्षणवादी और अन्य धरोहर प्रेमियों ने एक जनहित याचिका के जवाब में पटना उच्च न्यायालय द्वारा शुक्रवार को जारी स्थगनादेश का स्वागत करते हुए कहा कि यह ऐसे समय में उम्मीद की एक किरण है , जब धरोहर इमारतों को ध्वस्त करने का काम जारी है। वहीं कुछ का कहना है कि पटना समाहरणालय का हश्र अब भी सुल्तान पैलेस को लेकर उनके मन में आशंका पैदा कर रहा है।

‘विश्व पर्यटन दिवस’ से एक दिन पहले कुछ उन्होंने सुझाव दिया कि पैलेस को एक ‘‘भव्य होटल’’ का रूप देकर भी बचाया जा सकता है, जिससे पर्यटक पटना की ओर आकर्षित हो सकते हैं।

पटना के वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक प्रणव के. चौधरी ने कहा कि उनके लिए पटना के प्राचीन कलेक्टरेट को ध्वस्त होते देखना 1990 के उस दुखद समय को याद दिलाता है, जब डाक बंगला गिराया गया था।

उन्होंने ‘पीटीआई-’ से कहा, ‘‘ 30 वर्ष पहले 19वीं सदी के डाक बंगले को गिराना काफी दुखद था और फिर समाहरणालय को ऐसे ध्वस्त होते देखना भी बेहद पीड़ादायक था...इसको लेकर किसी को समाज में कोई पछतावा भी नहीं है। पटना ने पिछले 10 वर्ष में कई ऐतिहासिक इमारते खोईं हैं और फिर अब सुल्तान पैलेस को गिराकर उसकी जगह पांच सितारा होटल बनाने का प्रस्ताव...हमें यह सब रोकना होगा।’’

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)