ताजा खबरें | न्यायाधीशों के खाली पदों को भरने के लिए कार्यपालिका, न्यायपालिका के बीच तालेमल हो :संसदीय समिति

नयी दिल्ली, 27 मार्च संसद की एक समिति ने 25 उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों के रिक्त पदों को समय पर भरने के लिए कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच तालमेल बनाये जाने की जरूरत का जिक्र करते हुए कहा कि सेवानिवृत्ति को ध्यान में रखते हुए नयी नियुक्तियों के लिए एक संस्थागत प्रणाली तैयार की जाए।

समिति ने यह भी कहा कि न्यायिक नियुक्ति की प्रक्रिया और लंबित मामले गंभीर मुद्दे हैं, जिन पर ‘‘तत्काल ध्यान’’ देने की आवश्यकता है।

कानून मंत्रालय के तहत आने वाले न्याय विभाग की 2025-26 के लिए अनुदान मांगों पर अपनी रिपोर्ट में समिति ने कहा, ‘‘नियुक्तियों और अनुशंसाओं पर समय से कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए न्यायपालिका और सरकार के बीच तालमेल होना चाहिए।’’

इसमें कहा गया है कि एक संस्थागत तंत्र विकसित किया जा सकता है जिसमें न्यायाधीश की सेवानिवृत्ति और उनकी जगह नये न्यायाधीश की नियुक्ति की प्रक्रिया में तालमेल बनाया जाए, जिससे सेवानिवृत्ति के तुरंत बाद रिक्त पद को भरा जाना सुनिश्चित हो सकेगा।

समिति ने सुझाव दिया कि सबसे अधिक लंबित मामलों वाले उच्च न्यायालयों-- इलाहाबाद, बंबई और राजस्थान -- को न्यायिक नियुक्तियों के लिए प्राथमिकता दी जानी चाहिए। समिति ने कहा कि सुचारू और कुशल संचालन सुनिश्चित करने के लिए अधिक प्रशासनिक कर्मचारियों, कनिष्ठ न्यायिक अधिकारियों और न्यायालय सहायकों को नियुक्त कर न्यायिक कार्यबल को बढ़ाया जा सकता है।

केरल उच्च न्यायालय के अपने हालिया अध्ययन दौरे के दौरान, समिति ने मोबाइल ई-सेवा केंद्र के कामकाज को देखा था, जिसकी व्यवस्था दूरदराज के जिलों में समय-समय पर की जाती है। ये मोबाइल ई-सेवा केंद्र दूर-दराज के स्थानों, विशेष रूप से आदिवासियों की अधिक आबादी वाले क्षेत्रों में लोगों को कानूनी सेवाएं प्रदान करते हैं।

एक मार्च तक, उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों के स्वीकृत 1,122 पदों में से 359 रिक्त थे।

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