जरुरी जानकारी | देश में अपनी तरह के 5जी मानक से वैश्विक पारिस्थितिकी से अलग- थलग पड़ने का खतरा: एयरटेल

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. दूरसंचार सेवा प्रदाता कंपनी भारती एयरटेल का मानना है कि भारत में अपनी तरह का विशिष्ट 5जी मानक तैयार करने का विचार दरअसल इस मामले में देश के लिये जोखिम वाला हो सकता है। यह भारत को वैश्विक पारिस्थितिकी से अलग-थलग कर सकता है। अलग 5जी मानक विकसित करना नवोन्मेष पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।

नयी दिल्ली, आठ दिसंबर दूरसंचार सेवा प्रदाता कंपनी भारती एयरटेल का मानना है कि भारत में अपनी तरह का विशिष्ट 5जी मानक तैयार करने का विचार दरअसल इस मामले में देश के लिये जोखिम वाला हो सकता है। यह भारत को वैश्विक पारिस्थितिकी से अलग-थलग कर सकता है। अलग 5जी मानक विकसित करना नवोन्मेष पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।

भारती एयरटेल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी गोपाल विट्टल ने आभासी तरीके से आयोजित भारत मोबाइल कांग्रेस 2020 में कहा, ‘‘कई बार ऐसी बातें होती हैं कि भारत के पास अपना 5जी मानक होना चाहिये। यह अस्तित्वपरक खतरा हो सकता है, जो भारत को वैश्विक पारिस्थितिकी तंत्र से बाहर कर सकता है और नवाचार की गति को धीमा कर सकता है। यदि आप ऐसा करने की अनुमति देते हैं, तो यह अपने नागरिकों को निराश करना होगा।’’

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विट्टल से पहले रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने भारतीय मोबाइल कांग्रेस को संबोधित किया। अंबानी ने कहा कि जियो का 5जी नेटवर्क स्वदेश में विकसित नेटवर्क, हार्डवेयर और प्रौद्योगिकीय उपकरणों पर आधारित होगा।

जियो ने दूरसंचार विभाग से नवीनतम 5जी प्रौद्योगिकी के परीक्षण के लिये स्पेक्ट्रम की मांग की है। कंपनी की पूर्ण स्वामित्व वाली अमेरिकी अनुषंगी रेडिसिस ने पहले ही कुछ विदेशी कंपनियों को 5जी समाधान बेचना शुरू कर दिया है।

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विट्टल ने कहा कि भारत के पास एक खुला पारिस्थितिकी तंत्र होना चाहिये। उन्होंने अपनी बात रखने के लिये सीडीएमए और जीएसएम का हवाला दिया।

उन्होंने कहा, ‘‘सीडीएमए बेहतर तकनीक थी, लेकिन जीएसएम इसलिये जीता क्योंकि यह अधिक स्वीकृत तकनीक थी। दुनिया की अधिक कंपनियों ने जीएसएम को अपनाया। जीएसएम इसलिये जीता क्योंकि यह वैश्विक पारिस्थितिकी तंत्र का हिस्सा बन गया और सीडीएमए पीछे छूट गया।’’

उन्होंने कहा कि ‘इंडिया ओपन इकोसिस्टम’ तैयार करने और भारत द्वारा भारत के लिये विकसित ऐप को बढ़ावा देने की आवश्यकता है।

विट्टल ने कहा, ‘‘इसके लिये हमें एक साथ आना होगा। हमें अपने मतभेदों को अलग करना होगा और एक तंत्र का हिस्सा बनना होगा। दूरसंचार सेवा प्रदाताओं, उपकरण निर्माताओं, डिवाइस निर्माताओं, विनिर्माण कंपनियों, सूचना प्रौद्योगिकी कंपनियों... सभी को एक साथ आना होगा। सभी को फायदा हो सकता है क्योंकि प्रौद्योगिकी की दुनिया इसे और अधिक उत्पादक बनाती है।’’

उन्होंने एक ऐसा नीतिगत माहौल तैयार करने का आह्वान किया, जो सस्ती तकनीक तक पहुंच दिलाता हो।

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