देश की खबरें | मौजूदा टीआरपी प्रणाली वैज्ञानिक नहीं, इसमें जोड़-तोड़ किये जाने का खतरा है :संसदीय समिति
एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली,15 अक्टूबर अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को एक संसदीय समिति से कहा कि टेलीविजन रेटिंग प्वाइंट (टीआरपी) मापने की मौजूदा प्रणाली ‘‘बहुत वैज्ञानिक नहीं’’ है और इसमें जोड़-तोड़ किये जाने का खतरा है। सूत्रों ने यह जानकारी दी।

कथित टीआरपी घोटाले को लेकर उपजे विवाद के बीच सूचना प्रौद्योगिकी पर संसदीय स्थायी समिति को इस मुद्दे पर और संबद्ध विषयों पर भारतीय प्रेस परिषद (पीसीआई) के अध्यक्ष न्यायमूर्ति सी. के. प्रसाद, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय में सचिव अमित खरे तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने जानकारी दी।

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समिति की अध्यक्षता कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने की। समिति की बैठक ‘‘मीडिया कवरेज में नैतिकता के मानदंड’’ विषय पर न्यूज ब्रॉडकॉस्टर्स एसोसिएशन (एनबीए), पीसीआई और प्रसार भारती के प्रतिनिधियों के विचार सुनने के लिये हुई।

समिति में मौजूद सूत्रों ने बताया कि ‘‘फेक न्यूज’’, कथित टीआरपी घोटाला और मौजूदा युग में मीडिया नियमन से जुड़े मुद्दों पर विस्तृत एवं व्यापक चर्चा हुई।

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सूत्रों ने बताया कि कुछ खास सवालों के जवाब में अधिकारियों ने समिति के सदस्यों से कहा कि टीआरपी का पता लगाने की मौजूदा प्रणाली ‘‘बहुत वैज्ञानिक और सटीक नहीं है।’’

अधिकारियों ने सुझाव दिया कि मौजूदा प्रणाली अभी के दौर में पुरानी पड़ चुकी है तथा इसमें जोड़-तोड़ या फर्जीवाड़ा किये जाने का खतरा है। साथ ही, यह दर्शकों की संख्या के बारे में वास्तविक तस्वीर भी नहीं पेश करती है क्योंकि आंकड़े एकत्र करने के स्थान बहुत कम हैं।

सूत्रों ने बताया कि हालांकि, समिति के सदस्यों ने इसकी कार्यवाही के दौरान किसी टीवी चैनल के नाम का जिक्र नहीं किया।

उल्लेखनीय है कि मुंबई पुलिस ने हाल ही में दावा किया था उसने टीआरपी घोटाले का भंड़ाफोड़ किया है और कम से कम पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किये गये लोगों में न्यूज चैनल के कर्मचारी भी शामिल हैं। पुलिस इस मामले के सिलसिले में अर्णब गोस्वामी नीत रिपब्लिक मीडिया ग्रुप के शीर्ष अधिकारियों से भी पूछताछ कर रही है। हाांकि, रिपब्लिक मीडिया ग्रुप ने किसी गलत कार्य में संलिप्त रहने से इनकार किया है।

इसबीच, ‘ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल’ (बीएआरसी) ने कथित रूप से फर्जी टीआरपी घोटाले के बाद समाचार चैनलों की रेटिंग को अस्थायी रूप से निलंबित करने की घोषणा की है।

बीएआरसी ने कहा कि काउंसिल ‘‘सांख्यिकीय मजबूती’’ में सुधार के लिए माप के वर्तमान मानकों की समीक्षा करने और उन्हें बेहतर बनाने का इरादा रखती है, और इस कवायद के चलते साप्ताहिक रेटिंग 12 सप्ताह तक ‘‘स्थगित’’ रहेगी।

बीएआरसी ने कहा इस कवायद के तहत तत्काल प्रभाव से सभी हिंदी, क्षेत्रीय, अंग्रेजी और बिजनेस न्यूज चैनल आयेंगे।

एनबीए ने समाचार चैनलों की साप्ताहिक रेटिंग को अस्थायी रूप से निलंबित करने के ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (बीएआरसी) के निर्णय को ‘‘साहसिक कदम’’ बताया।

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