देश की खबरें | माकपा ने मंत्री के दिवंगत रिश्तेदार के नाम पर मप्र में सैनिक स्कूल का नामकरण करने का विरोध किया

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भोपाल, 15 मई मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने मध्यप्रदेश में सार्वजनिक निजी भागीदारी (पीपीपी) के तहत स्थापित किए जा रहे एक सैनिक स्कूल का नामकरण राज्य के मंत्री प्रह्लाद पटेल के दिवंगत भतीजे के नाम पर करने का बृहस्पतिवार को विरोध किया।

माकपा ने एक बयान में कहा कि स्कूल का नाम भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता और राज्य के पंचायत मंत्री प्रह्लाद पटेल के भतीजे और पूर्व भाजपा विधायक जालिम सिंह पटेल के बेटे मणिनागेंद्र सिंह के नाम पर रखा जा रहा है।

माकपा के राज्य सचिव जसविंदर सिंह ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘मप्र में छठा सैनिक स्कूल नरसिंहपुर जिले के गोटेगांव में खुलने जा रहा है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह इसका उद्घाटन करने जा रहे हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि इस स्कूल का नाम मणिनागेंद्र सिंह के नाम पर रखा गया है।’’

सिंह ने दावा किया कि 2021 में नरसिंहपुर की एक अदालत ने मणिनागेंद्र और चार अन्य को एक आपराधिक मामले में एक साल जेल की सजा सुनाई, हालांकि उन्हें ऊपरी अदालत से जमानत मिल गई थी।

सिंह ने कहा कि मणिनागेंद्र सिंह को 2019 में एक दलित पर हमला करने के आरोप में 2023 में गिरफ्तार किया गया था और वह लगभग 15 दिनों तक जेल में रहे।

माकपा नेता ने आरोप लगाया कि मणिनागेंद्र सिंह की पत्नी ने उन पर दहेज उत्पीड़न का आरोप लगाया था और यहां तक कि एक प्राथमिकी भी दर्ज कराई थी और उन्होंने यह भी दावा किया था कि सिंह मादक पदार्थों के आदी थे।

उन्होंने कहा, ‘‘मणिनागेंद्र की 2023 में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। आमतौर पर, सार्वजनिक संस्थानों का नाम उन व्यक्तित्वों को सम्मानित करने के लिए रखा जाता है जिन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में समाज और देश के विकास में योगदान दिया है। हमें शैक्षणिक संस्थानों, खासकर सैनिक स्कूलों के नामकरण को लेकर और अधिक संवेदनशील होना चाहिए।’’

उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी न केवल गोटेगांव सैनिक स्कूल के लिए चुने गए नाम का विरोध करती है, बल्कि यह भी चाहती है कि सरकार उन सैनिक स्कूलों को अपने हाथ में ले ले, जो भाजपा-आरएसएस नेताओं को आवंटित किए गए हैं।

सिंह ने बताया कि 28 अप्रैल को प्रह्लाद पटेल ने रक्षा मंत्रालय के सैनिक स्कूल सोसाइटी का एक पत्र सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर साझा किया था, जिसमें नरसिंहपुर के गोटेगांव में मणिनागेंद्र सिंह फाउंडेशन द्वारा स्कूल की स्थापना के लिए ‘तत्कालिक मंजूरी’ दी गई थी।

माकपा नेता ने कहा, ‘‘पटेल खुद पूर्व केंद्रीय मंत्री हैं। नयी दिल्ली में 25 अप्रैल को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से उनकी मुलाकात के बाद यह मंजूरी दी गई।’’

मार्क्सवादी नेता ने दावा किया कि पिछले चार वर्षों में रक्षा मंत्रालय ने पीपीपी मॉडल के तहत मंदसौर, नीमच, खरगोन, कटनी और नर्मदापुरम में पांच सैनिक स्कूलों को अनुमति दी है।

उन्होंने कहा, ‘‘इन सभी स्कूलों का संचालन आरएसएस (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) से जुड़े संगठनों को सौंप दिया गया है। इन स्कूलों को बड़े पैमाने पर अनुदान मिलता है। आरएसएस की फासीवादी सांप्रदायिक विचारधारा से हम सभी परिचित हैं। हम जानते हैं कि सरस्वती शिशु मंदिरों में बच्चों की कोमल मानसिकता में किस तरह जहर घोलने की कोशिश की जाती है।’’

उन्होंने दावा किया कि यही प्रयास अब सैनिक स्कूलों में भी किया जाएगा।

उन्होंने कहा, ‘‘अगर इन स्कूलों से आने वाले बच्चे सेना में भर्ती हो जाते हैं तो सेना के धर्मनिरपेक्ष और स्वतंत्र चरित्र का क्या होगा। यह हम सभी के लिए चिंता का विषय होना चाहिए।’’

माकपा नेता ने दावा किया कि पीपीपी मॉडल के तहत देशभर में बन रहे 61 सैनिक स्कूलों में से 70 फीसदी को ‘संचालन’ के लिए आरएसएस और भाजपा नेताओं को सौंप दिया गया है।

उन्होंने कहा कि भारतीय सेना को दुनिया की सबसे अनुशासित, समर्पित और बहादुर सेनाओं में गिना जाता है और धर्मनिरपेक्षता, सांप्रदायिक सद्भाव और मानवता में इसका विश्वास एवं गौरवशाली अतीत एक उज्ज्वल भविष्य की आशा जगाता है।

उन्होंने आरोप लगाया कि जब से मोदी सरकार केंद्र में सत्ता में आई है सेना की इस प्रतिष्ठा और पहचान को दांव पर लगाया जा रहा है।

माकपा नेता पर पलटवार करते हुए प्रदेश भाजपा के प्रवक्ता पंकज चतुर्वेदी ने कहा कि वामपंथी पार्टियों की विचारधारा देश को बांटने की है।

उन्होंने कहा, ‘‘उन्हें लगता है कि सभी उनके जैसे हैं। आरएसएस और भाजपा की विचारधारा राष्ट्रवाद और देश प्रथम है। आरएसएस चरित्र निर्माण करने वाला संगठन है। कमेटी स्कूल खोलने और नाम तय करती है। कम्युनिस्टों को इस पर जहरीली राजनीति करना बंद करना चाहिए।’’

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