नयी दिल्ली, 20 जुलाई उच्चतम न्यायालय ने कर्नाटक उच्च न्यायालय के उस फैसले को बृहस्पतिवार को रद्द कर दिया जिसमें उसने भूमि अधिग्रहण के बदले राशि के भुगतान से संबंधी कर्नाटक झुग्गी क्षेत्र (सुधार एवं भुगतान) अधिनियम -1973 के एक प्रवाधान को अधिकारों से परे करार दिया था।
शीर्ष अदालत ने टिप्पणी की कि अधिनियम की धारा-20 की वैधता को चुनौती देने वाली याचिका का उच्च न्यायालय ने ‘‘रहस्यमयी तरीके’’ से निपटारा बिना सभी प्रासंगिक पहुलओं का विश्लेषण करते हुए किया जो संवैधानिक अदालत द्वारा राज्य विधायिक में पारित कानून के प्रावधान को अधिकातीत घोषित करने के लिए जरूरी होता है।
अधिनियम की धार-20 इस कानून के तहत अधिग्रहीत जमीन के बदले भुगतान से संबंधित है।
यह फैसला न्यायमूर्ति ए.एम.खानविलकर और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की पीठ ने दिया।
न्यायालय ने रेखांकित किया कि झुग्गी बस्ती का विकास और झुग्गीवासियों का पुनर्वास राज्य के लिए ‘‘निरंतर चलने वाला कार्य’’है जब तक कि इस पूरे मामले का निस्तारण नहीं हो जाता।
शीर्ष अदालत ने इसके साथ ही अगस्त 2012 में उच्च न्यायालय के खंडपीठ और सितंबर 2007 को उच्च न्यायालय के एकल पीठ द्वारा दिए गए फैसले को रद्द कर दिया। शीर्ष अदालत ने इसके साथ ही मामले में कानून के तहत बढ़ने के लिए उच्च न्यायालय में संबंधित फाइल को बहाल कर दिया।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)












QuickLY