नयी दिल्ली, चार फरवरी उच्चतम न्यायालय ने जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के एक प्रावधान को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर सुनवाई के लिए मंगलवार को 19 मार्च की तारीख तय की। याचिका में दावा किया गया है कि यह मतदाताओं को एकमात्र उम्मीदवार के मामले में नोटा विकल्प चुनने से रोकता है।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति एन कोटिस्वर सिंह की पीठ ने कहा, ‘‘यह एक बहुत ही प्रासंगिक मुद्दा है, हम जांच करना चाहेंगे। मामले को 19 मार्च के लिए सूचीबद्ध करें।’’
शीर्ष अदालत ने केंद्र को याचिका पर जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया।
पिछले साल 21 अक्टूबर को, शीर्ष अदालत याचिका की पड़ताल करने के लिए सहमत हुई थी और केंद्र तथा निर्वाचन आयोग को नोटिस जारी किया था।
कानूनी विचार मंच ‘विधि सेंटर फॉर लीगल पॉलिसी’ द्वारा दायर जनहित याचिका में जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 53 (2) की वैधता को चुनौती दी गई है।
धारा 53 (2) कहती है कि यदि चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों की संख्या भरी जाने वाली सीटों की संख्या के बराबर है, तो चुनाव अधिकारी तुरंत ऐसे सभी उम्मीदवारों को उन सीटों को भरने के लिए विधिवत निर्वाचित घोषित करेगा।
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