देश की खबरें | न्यायालय ने जानना चाहा : क्या हम विशेषज्ञता वाले क्षेत्रों में भी दखल दे सकते हैं?

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को जानना चाहा कि क्या वह कोविड-रोधी टीकों के क्लिनिकल परीक्षण के मुद्दे में दखल दे सकता है, क्योंकि यह विशेषज्ञों का क्षेत्र है।

नयी दिल्ली, दो मार्च उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को जानना चाहा कि क्या वह कोविड-रोधी टीकों के क्लिनिकल परीक्षण के मुद्दे में दखल दे सकता है, क्योंकि यह विशेषज्ञों का क्षेत्र है।

न्यायमूर्ति एल. नागेश्वर राव और न्यायमूर्ति बी. आर. गवई की खंडपीठ ने कहा कि टीकाकरण से संबंधित फैसला विशेषज्ञों द्वारा दिये गये डेटा के आधार पर लिया गया है।

पीठ ने कहा, ‘‘क्या हम विशेषज्ञता वाले क्षेत्र में दखल दे सकते हैं? भारत सरकार ने कुछ डेटा के आधार पर फैसला लिया है। क्या हम विशेषज्ञों की रिपोर्ट की प्रमाणिकता के बारे में दखल दे सकते हैं?’’

न्यायालय की यह टिप्पणी याचिकाकर्ता डॉ. जैकब पुलियल की ओर से पेश अधिवक्ता प्रशांत भूषण की दलीलों के जवाब में आई। याचिकाकर्ता ने कोविड-19 रोधी टीकों के क्लिनिकल परीक्षण से संबंधित डेटा के खुलासे की मांग की है। डॉ. पुलियल टीकाकरण को लेकर राष्ट्रीय तकनीकी परामर्श समूह के पूर्व सदस्य हैं।

पीठ ने कहा, ‘‘विज्ञान मंतव्यों से जुड़ा मामला है। क्या हम उस क्षेत्र में दखल दे सकते हैं जिसे हम नहीं समझते हैं? अलग-अलग मंतव्य हो सकते हैं। हम विशेषज्ञ नहीं हैं। हमें इसकी गहराई में जाने को न कहें।’’

भूषण ने अपनी दलील में कहा कि टीका लेना या नहीं लेना यह व्यक्तिगत निर्णय है और सहमति के बिना अनिवार्य टीकाकरण असंवैधानिक था।

उन्होंने कहा, ‘‘टीके से पूर्ण संरक्षण नहीं मिलता है। ऐसे अनेक मामले हैं जिनमें पूर्ण टीकाकरण वाले लोग फिर से संक्रमित हुए हैं। इसलिए टीकाकरण के लिए दबाव डालना सार्वजनिक स्वास्थ्य के उद्देश्यों की पूर्ति नहीं करता है।’’

मामले की सुनवाई अधूरी रही। अब इस मामले में आठ मार्च को सुनवाई होगी।

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