देश की खबरें | शक्ति मिल्स में टेलीफोन ऑपरेटर बलात्कार मामले में अदालत ने आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा

मुंबई, 25 नवंबर बंबई उच्च न्यायालय ने यहां 2013 में शक्ति मिल्स परिसर के भीतर 19 साल की एक टेलीफोन ऑपरेटर के सामूहिक बलात्कार के मामले में दोषी ठहराए गए एक व्यक्ति की आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा है।

उक्त घटना के एक महीने बाद शक्ति मिल्स परिसर में एक फोटो पत्रकार के साथ सामूहिक बलात्कार किया गया था और इस मामले में दोषी पाए गए तीन लोगों को सुनाई गयी मौत की सजा को आज अदालत ने आजीवन कारावास में तब्दील कर दिया।

न्यायमूर्ति साधना जाधव और न्यायमूर्ति पृथ्वीराज चव्हाण की खंडपीठ ने, मार्च 2014 में निचली अदालत द्वारा मोहम्मद अशफाक दाऊद शेख को सुनाई गई आजीवन कारावास की सजा के विरुद्ध दायर उसकी याचिका खारिज कर दी। अभियोजन पक्ष के अनुसार, 31 जुलाई 2013 को याचिकाकर्ता और छह अन्य, टेलीफोन ऑपरेटर और उसके मित्र को जबरदस्ती मध्य मुंबई की एक खाली पड़ी मिल में लेकर गए और पीड़िता के साथ सामूहिक बलात्कार किया।

एक महीने बाद उसी मिल में 22 साल की एक फोटो पत्रकार के साथ पांच लोगों ने सामूहिक बलात्कार किया था जिसके बाद मामला सामने आया। जांच के दौरान पुलिस ने पता लगाया कि उस स्थल पर एक महीने पहले इसी प्रकार का एक और कांड हो चुका है। दोनों मामलों में एक नाबालिग समेत सात लोगों को गिरफ्तार किया गया था।

निचली अदालत ने जहां तीनों अभियुक्तों को मौत की सजा सुनाई वहीं, शेख और एक अन्य आरोपी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। शेख की वकील अंजलि पाटिल ने कहा कि मामला फर्जी है और कथित घटना के एक महीने बाद दायर किया गया था। उच्च न्यायालय ने इस दलील को खारिज कर दिया।

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