देश की खबरें | अदालत ने यौन उत्पीड़न मामले की जांच कर रही पुलिस टीम से कहा: पत्रकारों को परेशान न करें

चेन्नई, चार फरवरी मद्रास उच्च न्यायालय ने अन्ना विश्वविद्यालय में एक छात्रा के यौन उत्पीड़न मामले की जांच कर रहे विशेष जांच दल (एसआईटी) को निर्देश दिया कि मामले में प्राथमिकी से जुड़ी खबरों को लेकर पत्रकारों को परेशान न किया जाए।

न्यायमूर्ति जी के इलांथिरायन ने पत्रकारों को भी जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया। न्यायमूर्ति इंलांथिरायन ने चेन्नई प्रेस क्लब और तीन पत्रकारों की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया।

इन तीनों पत्रकारों के मोबाइल फोन पुलिस ने जांच की आड़ में जब्त कर लिए थे।

इससे पहले, सुनवाई के दौरान चेन्नई प्रेस क्लब की ओर से अधिवक्ता के. एलंगोवन, तीन पत्रकारों की ओर से अधिवक्ताओं-- के बालू, ज्योतिमणि, विवेकानंदन और सी. अरुण ने दलीलें दीं।

वकीलों ने कहा कि प्रिंट या इलेक्ट्रॉनिक मीडिया ने पीड़िता की पहचान उजागर नहीं की लेकिन पत्रकारों को समन किया गया।

वकीलों ने कहा कि समन मिलने पर, पत्रकारों ने प्राथमिकी से जुड़ी जानकारी लीक होने के मामले से संबंधित जांच में सहयोग किया लेकिन उनके मोबाइल फोन एसआईटी द्वारा जब्त कर लिए गए।

उन्होंने बताया कि एसआईटी ने पत्रकारों को 56 सवालों वाली प्रश्नावली दी थी तथा उनमें से ज़्यादातर सवाल निजी जानकारी और उनके परिवार से जुड़े थे।

वकीलों ने कहा कि पत्रकारों को तीन बार बुलाकर पूछताछ की गई। उन्होंने कहा कि जांच की आड़ में एसआईटी ने पत्रकारों को परेशान किया।

वकीलों ने कहा कि प्राथमिकी पुलिस की वेबसाइट पर अपलोड की गई। उन्होंने कहा कि यह सार्वजनिक रूप से उपलब्ध थी।

वकीलों ने कहा कि एसआईटी ने प्राथमिकी अपलोड करने वाले अधिकारी से पूछताछ भी नहीं की, लेकिन पत्रकारों को परेशान किया गया।

सरकारी वकील मुहिलान ने दलील दी कि एसआईटी ने पत्रकारों को परेशान नहीं किया। उन्होंने कहा कि जांच के तहत पत्रकारों को तलब किया गया और पूछताछ की गई।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायाधीश ने कहा कि वह एक विस्तृत आदेश पारित करेंगे।

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