नयी दिल्ली, 24 फरवरी उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को केंद्र एवं राज्यों से देश में एचआईवी मरीजों के इलाज के लिए ‘‘एंटी-रेट्रोवायरल थेरेपी’’ दवाओं की गुणवत्ता पर अपना जवाब दायर करने को कहा।
न्यायमूर्ति अभय एस ओका और न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की पीठ गैर-सरकारी संगठन ‘‘नेटवर्क ऑफ पीपल लिविंग विथ एचआईवी/एड्स’’ और अन्य द्वारा दायर एक याचिका की सुनवाई कर रही थी।
याचिकाकर्ताओं ने ‘‘एंटी-रेट्रोवायरल थेरेपी’’ (एआरवी) दवाओं की आपूर्ति और गुणवत्ता पर चिंता जताई है।
याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकील ने कहा कि अब तक केवल चार राज्यों ने उनके द्वारा दायर हलफनामे पर अपनी प्रतिक्रियाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि हलफनामे में कुछ मुद्दों को रेखांकित किया गया था, जिनमें दवाओं की खरीद की प्रक्रिया और गुणवत्ता शामिल थी।
पीठ ने कहा, ‘‘सभी राज्यों को अपनी प्रतिक्रियाएं दायर करने दें।’’
पीठ ने पिछले साल सितंबर में याचिकाकर्ताओं द्वारा दायर हलफनामे पर केंद्र और राज्यों को एक महीने के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा।
मामले में अगली सुनवाई चार अप्रैल को होगी।
केंद्र ने पिछले साल जुलाई में उच्चतम न्यायालय को इस बात से अवगत कराया था कि सरकार राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम के तहत एआरवी थेरेपी केंद्रों के माध्यम से एचआईवी मरीजों को मुफ्त दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित कर रही है।
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