देश की खबरें | अदालत ने चुनाव आयोग से भीम आर्मी के प्रमुख की अर्जी पर मांगा जवाब

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को चुनाव आयोग से भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद की उस अर्जी पर जवाब मांगा जिसमें उन्होंने अदालत से आयोग को उनके राजनीतिक दल को ‘आजाद समाज पार्टी (कांशीराम)’ के नाम से पंजीकृत करने और आगामी बिहार विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए निशान आवंटित करने का निर्देश देने का अनुरोध किया है।

एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, सात अक्टूबर दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को चुनाव आयोग से भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद की उस अर्जी पर जवाब मांगा जिसमें उन्होंने अदालत से आयोग को उनके राजनीतिक दल को ‘आजाद समाज पार्टी (कांशीराम)’ के नाम से पंजीकृत करने और आगामी बिहार विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए निशान आवंटित करने का निर्देश देने का अनुरोध किया है।

न्यायमूर्ति जयंत नाथ ने आयोग को नोटिस जारी कर उससे जवाब मांगा और इस मामले की अगली सुनवाई की तारीख 20 अक्टूबर तय की। इस अर्जी में आपत्ति दर्ज कराने की अवधि 30 दिनों से घटाकर सात दिन करने की भी दरख्वास्त की गयी है।

यह भी पढ़े | मनीष सिसोदिया और उद्यमी किरण मजूमदार शाॅ ने बच्चों से किया संवाद, डिप्टी सीएम बोले-सिर्फ नौकरी के बदले ज्ञान के व्यापक उपयोग की समझ जरूरी.

चंद्रशेखर ने अपनी याचिका में कहा है कि वह और पार्टी के कार्यकर्ता बिहार चुनाव और उत्तर प्रदेश समेत दूसरे राज्यों में उपचुनाव में भाग लेने की गंभीर कोशिश कर रहे हैं लेकिन यदि आपत्तियां दर्ज कराने की अवधि 30 दिनों से नहीं घटायी जाती है तो वह पार्टी के नाम और निशान पर बिहार में विधानसभा चुनाव नहीं लड़ पायेंगे।

आयोग के वकील राजीव शर्मा ने यह कहते हुए इस याचिका का विरोध किया कि अन्य राजनीतिक दलों ने भी आपत्तियां दर्ज कराने की अवधि 30 दिनों से घटाने का अनुरोध किया था जिसे आयोग ने पहले ही खारिज कर दिया।

यह भी पढ़े | MP Bypolls 2020: मध्य प्रदेश विधानसभा उप चुनाव के लिए BSP ने जारी की 9 उम्मीदवारों की तीसरी लिस्ट.

उन्होंने कहा कि समय में एक बारगी ढील 2019 में दी गयी थी लेकिन अब इसे नहीं किया जा सकता है।

याचिका के अनुसार याचिकाकर्ता ने 16 मार्च को ही चुनाव आयोग में आवेदन दिया था और कुछ आपत्तियां दूर करने के चार अगस्त के पत्र के संदर्भ में उन्होंने 13 अगस्त को आयोग की सभी जरूरतें पूरी कीं।

याचिका के मुताबिक जब पार्टी नाम के पंजीकरण का पत्र नहीं जारी किया गया तब याचिकाकर्ता उच्च न्यायालय पहुंचे और सुनवाई से एक ही दिन पहले पार्टी के नाम की मंजूरी दी गयी।

याचिकाकर्ता ने कहा कि आयोग के निर्देश के मुताबिक उन्होंने अपनी पार्टी के नाम के सिलसिले में 30 दिनों में आपत्तियों के लिए हिंदी और अंग्रेजी के दो राष्ट्रीय एवं स्थानीय अखबारों में 25 सितंबर और 26 सितंबर को सार्वजनिक नोटिस छपवाये लेकिन आयोग ने इसी बीच 25 सितंबर को बिहार विधानसभा चुनाव की घोषणा कर दी।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)

Share Now

\