देश की खबरें | अदालत ने बिहार ओलंपिक संघ के मामलों की जांच के लिए तदर्थ समिति बनाने के फैसले को खारिज किया

नयी दिल्ली, 24 फरवरी दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) के उस निर्णय को खारिज कर दिया जिसमें बिहार ओलंपिक संघ के मामलों की जांच के लिए एक तदर्थ समिति गठित करने का निर्णय लिया गया था।

न्यायमूर्ति सचिन दत्ता ने बिहार ओलंपिक संघ की याचिका पर यह फैसला सुनाया जिसमें कहा गया था कि निकाय के चुनाव तीन महीने में होंगे।

न्यायालय ने कहा, ‘‘मैंने 1 जनवरी, 2025 के आदेश को खारिज कर दिया है। न्यायालय ने याचिकाकर्ता के इस कथन को रिकॉर्ड में ले लिया है कि चुनाव तीन महीने के भीतर होंगे।’’

अधिवक्ता नेहा सिंह ने याचिकाकर्ता की ओर से तर्क दिया था कि संघ के कामकाज और चुनाव प्रक्रिया के संबंध में कुछ कथित शिकायतों पर नवंबर 2024 में एकल सदस्यीय तथ्यान्वेषी समिति की नियुक्ति एकतरफा थी।

इसमें कहा गया कि आईओए अध्यक्ष द्वारा एक जनवरी को जारी तदर्थ समिति के गठन के अवैध आदेश को बरकरार नहीं रखा जा सकता। इसलिए याचिकाकर्ता ने इसकी स्थिति को बहाल करने की मांग की और आरोप लगाया कि किसी भी बिंदु पर उसे उसके खिलाफ प्राप्त कथित अभ्यावेदन के बारे में सूचित नहीं किया गया और उसे पक्ष रखने का कोई अवसर नहीं दिया गया।

सिंह ने कहा कि आईओए का संविधान उसके अध्यक्ष को विधिवत निर्वाचित और विधिवत पंजीकृत निकाय के स्थान पर ‘तदर्थ समिति’ गठित करने का अधिकार नहीं देता, जबकि इस तरह के कठोर कदम उठाने से पहले आईओए कार्यकारी समिति के सदस्यों से कोई परामर्श नहीं किया गया था।

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