बेंगलुरु, 23 अक्टूबर कर्नाटक उच्च न्यायालय ने पत्रकार गौरी लंकेश हत्या मामले के एक आरोपी द्वारा निचली अदालत के आदेश को चुनौती देते हुए दायर एक अर्जी खारिज कर दी जिसमें उसने 'स्वत: जमानत का अनुरोध किया था।
महाराष्ट्र के ऋषिकेश देवदीकर को जनवरी 2020 में गिरफ्तार किया गया था और मामले के सिलसिले में न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था। बाद में उसने विशेष अदालत में दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 167(2) के तहत स्वत: जमानत के लिए एक अर्जी दायर की।
हालांकि, उसकी अर्जी पर अदालत ने विचार नहीं किया, इसलिए उसने इसके खिलाफ उच्च न्यायालय का रुख किया।
आरोपी ने दलील दी थी कि चूंकि यह हत्या का मामला है, इसलिए गिरफ्तारी के 90 दिनों के भीतर आरोपपत्र दाखिल करना था लेकिन 4 अप्रैल, 2020 को भी उसके खिलाफ कोई आरोपपत्र दाखिल नहीं किया गया। इसलिए उसे सीआरपीसी की धारा 167 की उपधारा (2) के तहत स्वत: ही जमानत मिल जानी चाहिए।
सरकारी अधिवक्ता ने दलील दी कि देवदीकर फरार था और उसकी अनुपस्थिति में आरोपपत्र पहले ही दायर किया जा चुका है।
न्यायमूर्ति सूरज गोविंदराज ने 21 अक्टूबर, 2022 को यह कहते हुए याचिका खारिज कर दी कि इस आरोपी की गिरफ्तारी से पहले ही मामले में आरोपपत्र दायर किया जा चुका है। इसलिए, वह सीआरपीसी की धारा 167 की उपधारा (2) का लाभ का अनुरोध नहीं कर सकता।
न्यायाधीश ने कहा, ‘‘कोई भी आरोपी ऐसी स्थिति में सीआरपीसी की धारा 167 की उपधारा (2) के तहत लाभ का हकदार नहीं होगा, यदि उसकी गिरफ्तारी से पहले ही आरोपपत्र दायर किया जा चुका है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘मेरा सुविचारित मत है कि वर्तमान मामले में, याचिकाकर्ता की गिरफ्तारी से पहले ही याचिकाकर्ता के खिलाफ आरोपपत्र दायर किया जा चुका है, याचिकाकर्ता को एक आरोपी के तौर पर अभ्यारोपित किया गया है और कुछ अपराध का आरोप लगाया गया है, मेरा विचार है कि उसे सीआरपीसी की धारा 167 की उपधारा (2) का लाभ नहीं मिलेगा।’’
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