देश की खबरें | अदालत ने धोखाधड़ी को लेकर भवन निर्माण कंपनी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. गुरुग्राम में पहले से अन्य लोगों को बेचे जा चुके फ्लैट फिर से बेचकर फर्जीवाड़ा और धोखाधड़ी में कथित तौर पर संलिप्त रही एक भवन निर्माण कंपनी के खिलाफ यहां की एक अदालत ने दिल्ली पुलिस को दो प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया है।

नयी दिल्ली, 15 अप्रैल गुरुग्राम में पहले से अन्य लोगों को बेचे जा चुके फ्लैट फिर से बेचकर फर्जीवाड़ा और धोखाधड़ी में कथित तौर पर संलिप्त रही एक भवन निर्माण कंपनी के खिलाफ यहां की एक अदालत ने दिल्ली पुलिस को दो प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया है।

मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट दिनेश कुमार ने पैरामाउंट इंफ्राटेक प्राइवेट लिमिटेड और चोरारिया सिक्योरीटिज लिमिटेड की राहेजा डेवलपर्स लिमिटेड के खिलाफ दायर दो अलग शिकायतों पर एक आदेश जारी किया।

अदालत ने कहा कि आरोपों से प्रथम दृष्टया यह प्रदर्शित होता है कि भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 406 (विश्वास को आपराधिक रूप से भंग करना), 420 (धोखाधड़ी) और 120बी (आपराधिक साजिश रचने) के तहत यह अपराध दंडनीय है।

न्यायाधीश ने कहा, ‘‘शिकायतों से संज्ञेय अपराध होने का पता चलता है। विषय की जांच की जरूरत है। यह जरूरी जान पड़ता है कि विषय की जांच पुलिस उपयुक्त रूप से करे क्योंकि यह शिकायतकर्ता के लिए सभी साक्ष्य जुटाना और उन्हें अदालत में पेश करना संभव नहीं होगा।’’

अदालत ने कहा कि सूचना की विश्वसनीयता प्राथमिकी दर्ज करने के लिए आवश्यक अर्हता नहीं है और दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा को एक प्राथमिकी दर्ज करने तथा विषय की गहन जांच करने का निर्देश दिया।

अदालत ने आठ अप्रैल को जारी अपने आदेश में कहा, ‘‘यह कहने की जरूरत नहीं है कि जांच अधिकारी शिकायतकर्ता की भूमिका की भी जांच करने के अपने अधिकारों में ठीक ही होंगे।’’

न्यायाधीश ने पुलिस को दोनों प्राथमिकियों की प्रतियां 10 दिनों के अंदर जमा करने का निर्देश दिया और विषय की अगली सुनवाई 11 मई के लिए निर्धारित कर दी।

प्रथम शिकायत के मुताबिक, पैरामाउंट इंफ्राटेक प्रा.लि. ने हरियाणा में गुरुग्राम स्थित सोहना रोड पर राहेजा मॉल सेक्टर 47 में आरोपी की परियोजना में 13 इकाइयां बुक की थी। साथ ही, इसके लिए उसने आरोपी कंपनी को 6.75 करोड़ रुपये का भुगतान किया था।

हालांकि, बाद में शिकायतकर्ता को पता चला कि आरोपी व्यक्तियों ने शिकायतकर्ता की सहमति के बगैर एक दुकान किसी तीसरे व्यक्ति को बेच दी है।

शिकायतकर्ता ने यह भी दावा किया है कि उसने आरोपी कंपनी की परियोजनाओं में पांच अलग-अलग इकाइयां बुक की थी और उन इकाइयों को कुछ अन्य कंपनी के नाम पर हस्तांतरित कर दिया गया, जबकि शिकायतकर्ता ने पूरी राशि का भुगतान कर दिया था।

दूसरी शिकायत के मुताबिक, चोरारिया सिक्योरीटिज लि. ने आरोपी कंपनी राहेजा डेवलपर्स लि. की एक परियोजना में तीन फ्लैट बुक किये थे।

हालांकि, बाद में शिकायतकर्ता को पता चला कि आरोपी ने उनमें से दो फ्लैट किसी अन्य को बेच दिये हैं।

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि शिकायतकर्ता ने पुलिस से संपर्क किया था लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई।

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