देश की खबरें | अदालत ने आरोपी की वास्तविक उम्र निर्धारण को लेकर दिशा-निर्देश के कार्यान्वयन पर रिपोर्ट मांगी
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएसएलएसए) को निर्देश दिया है कि वह उन आरोपियों की वास्तविक उम्र की पहचान करने और निर्धारण के लिए पहले जारी दिशा-निर्देशों पर अमल से संबंधित रिपोर्ट दो हफ्तों में प्रस्तुत करे, जिनकी आयु 18 से 21 वर्ष के बीच बताई गई है।
नयी दिल्ली, 15 फरवरी दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएसएलएसए) को निर्देश दिया है कि वह उन आरोपियों की वास्तविक उम्र की पहचान करने और निर्धारण के लिए पहले जारी दिशा-निर्देशों पर अमल से संबंधित रिपोर्ट दो हफ्तों में प्रस्तुत करे, जिनकी आयु 18 से 21 वर्ष के बीच बताई गई है।
न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल की अगुवाई वाली पीठ ने कहा कि 2012 में उच्च न्यायालय ने निर्देशों के अनुपालन और कार्यान्वयन के संबंध में पुलिस अधिकारियों से हर छह महीने में एक रिपोर्ट मांगी थी, लेकिन रिपोर्ट कभी नहीं दी गई। पीठ किशोर न्याय अधिनियम के कुछ प्रावधानों की व्याख्या और उनके प्रभावी कार्यान्वयन से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर विचार कर रही थी।
एक अन्य पीठ ने 11 मई 2012 को विधि का उल्लंघन करने वाले किशोरों के अधिकारों पर विचार करते हुए ऐसे किशोरों को जेल में डालने या वयस्क अपराध न्याय प्रणाली के अधीन उन्हें करने से रोकने के लिये दिशा-निर्देश तय किये थे।
दिल्ली बाल अधिकार संरक्षण आयोग और डीएसएलएसए की ओर से पेश वकील ने दावा किया कि इन विस्तृत दिशानिर्देशों का पालन नहीं किया गया है।
डीएसएलएसए ने पीठ को बताया कि गिरफ्तार व्यक्ति की आयु सत्यापन के लिए मानक प्रारूप गिरफ्तारी मेमो में कुछ संशोधनों का प्रस्ताव किया गया है कि जो प्रशासनिक स्तर पर लंबित है और इसको जल्द ही अंतिम रूप दिए जाने की उम्मीद है। पीठ में न्यायमूर्ति अनूप जे भंभानी भी शामिल हैं।
अदालत को बताया कि पैरा विधि स्वयंसेवकों के लिए डीएसएलएसए योजना में बदलाव पर भी विचार किया जा रहा है।
अदालत ने अपने 10 फरवरी के आदेश में कहा कि डीएसएलएसए के सचिव दो हफ्ते के अंदर 11 मई 2012 के फैसले के संबंध में अदालत में रिपोर्ट दायर करें।
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