मुंबई, 30 जून यहां की एक मजिस्ट्रेट अदालत ने सोमवार को महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री नवाब मलिक के खिलाफ मानहानि की कार्यवाही बंद कर दी, क्योंकि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता मोहित कंबोज ने अपनी शिकायत वापस ले ली।
अदालत ने फैसला सुनाया, "आरोपी को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 500 (मानहानि) के तहत अपराध से बरी किया जाता है और कार्यवाही बंद की जाती है।"
कंबोज ने दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 257 के तहत मामला वापस लेने के लिए अर्जी दी थी।
उक्त प्रावधान शिकायतकर्ता को अंतिम आदेश पारित होने से पहले किसी भी समय अपनी शिकायत वापस लेने की अनुमति देते हैं, बशर्ते मजिस्ट्रेट वापसी के आधार से संतुष्ट हो। यदि अनुमति दी जाती है, तो मजिस्ट्रेट आरोपी को बरी कर देगा।
कंबोज ने अपनी अर्जी में कहा, "चूंकि यह अदालत उक्त मामले की सुनवाई दिन-प्रतिदिन के आधार पर करना चाहती है, इसलिए मैं आरोपी के खिलाफ दायर मामला वापस लेना चाहता हूं, क्योंकि मैं रोजाना अदालत में उपस्थित नहीं हो पाऊंगा।"
इसमें कहा गया है, "मैंने स्वेच्छा से मामला वापस लेने का फैसला किया है और इस संबंध में मुझ पर कोई अनुचित दबाव या जबरदस्ती नहीं की गई है।"
वर्ष 2021 में अदालत में दायर एक शिकायत में, कंबोज ने आरोप लगाया कि मलिक ने उस वर्ष अक्टूबर में एक क्रूज जहाज पर स्वापक नियंत्रण ब्यूरो (एनसीबी) द्वारा छापेमारी के बाद उन्हें और उनके रिश्तेदार को बदनाम किया था।
उन्होंने दावा किया कि मलिक ने एनसीबी द्वारा अभिनेता शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान सहित कई लोगों को गिरफ्तार करने पर संवाददाता सम्मेलन में उन्हें (कंबोज को) और उनके रिश्तेदार ऋषभ सचदेव को जानबूझकर बदनाम किया।
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