देश की खबरें | अदालत ने महाराष्ट्र सरकार से पूछा, क्या कोविड-19 रोगियों से अधिक वसूली रोकने की कोई प्रणाली है

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. बंबई उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को महाराष्ट्र सरकार से पूछा कि निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम्स में कोविड-19 के उपचार के लिए नागरिकों से अधिक शुल्क लिये जाने की शिकायतों के निवारण के लिए क्या राज्य में कोई प्रणाली है।

एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

मुंबई, एक अक्टूबर बंबई उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को महाराष्ट्र सरकार से पूछा कि निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम्स में कोविड-19 के उपचार के लिए नागरिकों से अधिक शुल्क लिये जाने की शिकायतों के निवारण के लिए क्या राज्य में कोई प्रणाली है।

मुख्य न्यायाधीश दीपांकर गुप्ता और न्यायमूर्ति गिरीश कुलकर्णी की पीठ एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें अनुरोध किया गया था कि राज्य सरकार एक अधिकतम मूल्य तय करे जो निजी अस्पताल और नर्सिंग होम पीपीई किट के लिए लागू कर सकते हैं।

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पिछली सुनवाई में राज्य सरकार ने अदालत को बताया था कि उसने बिस्तरों के लिए तथा 80 प्रतिशत बिस्तरों के लिहाज से पीपीई किट समेत आवश्यक वस्तुओं के लिए शुल्क सीमा तय की थी, वहीं निजी अस्पताल और नर्सिग होम्स को कोविड और गैर-कोविड दोनों तरह के मरीजों के इलाज के वास्ते बाकी 20 प्रतिशत बिस्तरों के लिए अपनी दरें तय करने की अनुमति दी थी।

राज्य सरकार ने तब कहा था कि वह पूरी तरह निजी अस्पतालों पर नियंत्रण नहीं कर सकी है।

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याचिकाकर्ता अभिजीत मंगाड़े ने बृहस्पतिवार को अदालत से अनुरोध किया कि राज्य को बाकी बिस्तरों के लिए भी पीपीई किट के शुल्क की अधिकतम सीमा तय करने का निर्देश दिया जाए।

तब अदालत ने राज्य सरकार से पूछा कि क्या वह कोविड-19 रोगियों से अतिरिक्त शुल्क वसूलने वाले निजी संस्थानों के खिलाफ कोई कार्रवाई कर सकती है।

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