जरुरी जानकारी | सहकारिता क्षेत्र 70 करोड़ वंचितों की आकांक्षा पूरी करने में कर सकता है मददः शाह
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह ने सोमवार को कहा कि सहकारिता क्षेत्र भारत को आत्मनिर्भर बनाने के साथ ही देश के 70 करोड़ वंचितों को आर्थिक रूप से समृद्ध करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
नयी दिल्ली, चार जुलाई केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह ने सोमवार को कहा कि सहकारिता क्षेत्र भारत को आत्मनिर्भर बनाने के साथ ही देश के 70 करोड़ वंचितों को आर्थिक रूप से समृद्ध करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
शाह ने 100वें अंतरराष्ट्रीय सहकारिता दिवस के उपलक्ष्य में यहां आयोजित एक सम्मेलन में कहा कि सरकार ने आजादी के 75वें साल में सहकारिता मंत्रालय बनाकर देश में सहकारिता आंदोलन में नई जान फूंकने का काम किया है। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार ने पिछले आठ वर्षों में गरीबों की भलाई और उन्हें बिजली, रसोई गैस, आवास तथा स्वास्थ्य बीमा देने के लिए कई कार्यक्रम शुरू किए हैं।
शाह ने कहा कि करीब 70 करोड़ लोग वंचित समुदाय से आते हैं और उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में सहकारी समितियों से बेहतर कोई नहीं हो सकता है। उन्होंने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री ने इन लोगों की आकांक्षा जगाई है। सिर्फ सहकारी समितियां ही इन आकांक्षाओं को पूरा करने में सक्षम हैं।’’
केंद्रीय मंत्री ने कांग्रेस पार्टी पर हमला करते हुए कहा कि उन्होंने सिर्फ ''गरीबी हटाओ'' का नारा दिया, लेकिन गरीबी को खत्म करने के लिए पर्याप्त उपाय नहीं किए। शाह ने कहा, ‘‘ये 70 करोड़ लोग अब बेहतर जीवन की आकांक्षा कर रहे हैं और इसे सिर्फ सहकारी क्षेत्र ही पूरा कर सकता है।’’
उन्होंने कहा कि पूंजीवाद और साम्यवाद शासन के चरम रूप हैं और विकास का सहकारी मॉडल ही देश के लिए सबसे उपयुक्त है। सहकारिता मंत्रालय सहकारी क्षेत्र को पेशेवर और बहुआयामी बनाकर विभिन्न पहलुओं पर काम कर रहा है।
उन्होंने कहा कि कौशल प्रशिक्षण देने के लिए लेखांकन, विपणन और प्रबंधन जैसे विषयों पर आधारित एक सहकारी विश्वविद्यालय स्थापित किया जाएगा।
शाह ने कहा कि प्रशिक्षित जनशक्ति को सहकारी समितियों में शामिल किया जा सकता है और इससे नियुक्तियों में भाई-भतीजावाद भी समाप्त होगा।
उन्होंने कहा कि सहकारिता से संबंधित कानूनों में बदलाव की जरूरत है लेकिन इसके साथ ही उन्होंने सहकारी समितियों के बीच स्व-नियमन पर भी जोर दिया।
शाह ने कहा कि सरकार ने हाल ही में 2,516 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ सभी कार्यात्मक 63,000 प्राथमिक कृषि ऋण समितियों के कंप्यूटरीकरण का फैसला किया है। इस कदम से लेखांकन और बही-खाता पद्धति में पारदर्शिता आएगी।
भारत में 8.5 लाख सहकारी समितियां हैं और लगभग 12 करोड़ लोग इस क्षेत्र से सीधे जुड़े हुए हैं।
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