जरुरी जानकारी | स्वयं-सहायता समूहों में फंसा कर्ज घटकर 1.8 प्रतिशत पर आयाः गिरिराज
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नयी दिल्ली, 18 अप्रैल ग्रामीण विकास मंत्री गिरिराज सिंह ने मंगलवार को कहा कि स्वयं-सहायता समूहों (एसएचजी) में गैर-निष्पादित परिसंपत्तियां (एनपीए) घटकर 1.8 प्रतिशत पर आ गयी हैं और एक प्रतिशत से कम एनपीए वाले समूहों को बैंक रियायत दें।
सिंह ने यहां एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि स्वयं-सहायता समूहों के एनपीए यानी फंसे कर्ज में बड़ी गिरावट आई है। उन्होंने कहा, "वर्ष 2014 में यह 9.58 प्रतिशत पर हुआ करता था लेकिन अब यह घटकर 1.8 प्रतिशत पर आ गया है।"
उन्होंने कहा कि जरूरतमंद लोगों को दिया गया कर्ज एनपीए नहीं बनता है।
सिंह कहा, "सहकारिता मंत्री रहते समय मैंने यह जानने के लिए एक टीम बांग्लादेश भेजी थी कि वहां एनपीए कम क्यों है। टीम के लौटने पर मुझे पता चला कि जरूरत पर आधारित वित्तपोषण कभी भी एनपीए नहीं बनता है। सिर्फ अंकित मूल्य पर दिए गए कर्ज ही एनपीए बनते हैं।"
उन्होंने कहा कि कर्जों पर चुकाए गए ब्याज पर तीन प्रतिशत की छूट दी जाएगी। इसके साथ ही उन्होंने बैंकों से आग्रह किया कि एक प्रतिशत से कम एनपीए वाले स्वयं-सहायता समूहों को कुछ रियायतें दी जाएं।
मंत्री ने स्वयं-सहायता समूहों में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का जिक्र करते हुए कहा कि इस संख्या को वर्ष 2024 तक बढ़ाकर 10 करोड़ तक पहुंचाने का इरादा है। फिलहाल नौ करोड़ से अधिक महिलाएं इन समूहों से जुड़ी हुई हैं।
प्रेम
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