देश की खबरें | शरणार्थियों, शरण चाहने वालों को खाद्य सुरक्षा संबंधी याचिका पर शीर्ष अदालत ने केंद्र से मांगा जवाब

नयी दिल्ली, 29 नवंबर उच्चतम न्यायालय सोमवार को देश में रहने वाले अफगान, रोहिंग्या और अन्य देशों के शरणार्थियों एवं शरण चाहने वालों के लिए खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने संबंधी याचिका पर सुनवाई के लिए सहमत हो गया।

न्यायमूर्ति डी.वाई. चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति ए.एस. बोपन्ना की पीठ ने वकील फैजल अब्दाली द्वारा दायर एक याचिका पर केंद्र को नोटिस जारी किया। याचिकाकर्ता ने दलील दी कि भोजन का अधिकार अनुच्छेद 21 के तहत आता है और शरणार्थियों और शरण चाहने वालों को खाद्य सुरक्षा दी जानी चाहिए।

अब्दाली ने कहा कि उनकी जानकारी के अनुसार महामारी के दौरान ऐसे शरणार्थियों को खाद्यान्न उपलब्ध कराने की कोई योजना नहीं है।

पीठ ने अब्दाली की याचिका पर नोटिस तो जारी किया, लेकिन कहा कि उन्हें व्यक्तिगत तौर पर पेश नहीं होना था, क्योंकि उनके लिए एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड मौजूद है। उसके बाद एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड अमीय शुक्ला ने बहस शुरू की और कहा कि शरणार्थी भी खाद्यान्न के अधिकार के हकदार हैं, लेकिन फिलहाल उनके लिए ऐसी कोई योजना नहीं है।

याचिका में कहा गया है कि कोविड-19 संकट के कारण आर्थिक मंदी ने शरणार्थियों और शरण चाहने वालों के बीच खाद्य असुरक्षा पैदा कर दी है और उनकी समस्या को कम करने के लिए उचित कदम उठाने में राज्य सरकारों की विफलताओं का उन पर गंभीर परिणाम होगा।

अब्दाली ने अपनी याचिका में कहा है कि 31 जनवरी की यूएनएचसीआर फैक्टशीट के अनुसार, भारत में रहने वाले 2,10,201 शरणार्थी और शरण चाहने वाले शामिल हैं, जो दिल्ली, हरियाणा, केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर, तेलंगाना, मणिपुर और मिजोरम सहित देश के विभिन्न हिस्सों में हैं।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)