नगरोटा (जम्मू), 28 सितंबर जम्मू कश्मीर में नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर घुसपैठ के ज्यादा प्रयास नहीं हो रहे हैं क्योंकि पाकिस्तान में आतंकवादी संगठनों ने अपने सदस्यों को बाढ़ प्रभावित बलूचिस्तान और सिंध के इलाकों में राहत कार्य के लिये भेजा है। एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी ने बुधवार को यह जानकारी दी।
सेना की 16वीं कोर के जनरल ऑफिसर कमांडिंग (जीओसी) लेफ्टिनेंट जनरल मनजिंदर सिंह ने कहा कि जम्मू क्षेत्र में पीर पंजाल इलाके के दक्षिण में घटनाओं को अंजाम देने की फिराक में लगे आतंकवादी और उनके आका दुनिया को यह दिखाना चाहते हैं कि समूचा जम्मू-कश्मीर परेशान है और आतंकवाद सिर्फ कश्मीर क्षेत्र तक सीमित नहीं है।
उन्होंने यहां एक कार्यक्रम से इतर संवाददाताओं को बताया, “इन कारकों (पाकिस्तान में बाढ़ के हालात, बलूचिस्तान और सिंध में आतंकवादियों को भेजा जाना, पाकिस्तान पर एफएटीएफ का दबाव और संयुक्त राष्ट्र महासभा का चल रहा सत्र) की वजह से पिछले कुछ दिनों के दौरान, ज्यादा प्रयास (घुसपैठ का) नहीं किया जा रहा है।”
उन्होंने कहा कि जिस दिन ये स्थितियां बदलेंगी सामने वाला पक्ष फिर से नियंत्रण रेखा पर घुसपैठ को अंजाम देने का प्रयास करेगा।
क्या संर्दियों से पहले एलओसी पर घुसपैठ के प्रयासों में वृद्धि हुई है, सैन्य अधिकारी ने सीमा पर मौजूदा स्थिति का विवरण देते हुए कहा कि पाकिस्तान में मौजूदा हालात का तीन से चार कारकों के आधार पर विश्लेषण करना होगा।
लेफ्टिनेंट जनरल सिंह ने कहा, “यहां बाढ़ है। बड़ी संख्या में नेता आतंकवादी समूहों की अच्छी छवि दिखाने की कोशिश करते हैं। कई आतंकवादी समूहों ने अपने सदस्यों को बाढ़ प्रभावित लोगों की मदद के लिये बलूचिस्तान और सिंध में भेजा है।”
उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान पर एफएटीएफ का दबाव और संयुक्त राष्ट्र महासभा का चल रहा सत्र भी अन्य कारक हैं।
उन्होंने कहा, “हमें हालात की जानकारी है। हम आपको विश्वास दिलाते हैं कि हमारा तंत्र प्रभावी है। पिछले दो साल से किसी भी तरह की घुसपैठ नहीं होने दी जा रही थी और हम यह सुनिश्चित करेंगे कि हमारे इलाके में कोई घुसपैठ न हो।”
लेफ्टिनेंट जनरल सिंह ने हालांकि कहा कि पाकिस्तान, आईएसआई और अन्य संबंधित पक्ष घुसपैठ को अंजाम देने का प्रयास करेंगे।
उन्होंने जोर देकर कहा, “हम उन्हें नाकाम कर देंगे। वे कुछ भी करें, हम उन्हें उनके मंसूबों में कामयाब नहीं होने देंगे।”
हिंसा के बारे में एक अन्य सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि इसमें कमी आई है।
उन्होंने यह भी बताया कि जम्मू क्षेत्र में आतंकवादियों की कोई भर्ती नहीं हुई।
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