देश की खबरें | 1962 की लड़ाई के 59 वर्षों बाद चीन के साथ सीमा पर तनाव व्याप्त लेकिन तवांग बेखबर

तवांग (अरुणाचल प्रदेश), सात दिसंबर ढलाव वाली टिन की छत, लकड़ी और ईंट से बने घरों के छोटे-से शहर तवांग में आने वाले पर्यटकों के लिए यह विश्वास करना मुश्किल है कि आजादी के बाद भारत की सबसे निर्णायक लड़ाइयों में से एक इसी शहर में 59 साल पहले लड़ी गयी थी।

हर जगह नूडल्स से लेकर डोसा तक बेच रहे रेस्त्रां और नए कारोबारी उद्देश्यों के लिए घर लौट रहे स्थानीय लोगों को देखकर यह अंदाजा लगा पाना कठिन है कि इस शहर से उत्तर की ओर 40 किलोमीटर दूर सीमा पर कहीं तनाव भी बना हुआ है। तवांग अरुणाचल प्रदेश की राजधानी ईटानगर से करीब 445 किलोमीटर दूर और 10,000 फुट की ऊंचाई पर स्थित है।

चीन के साथ लगती सीमा पर हिमालय के बर्फीले हिस्से में स्थित इस शहर की रक्षा के लिए सुरक्षाबलों का काफिला मौजूद रहता है। भारत के उत्तरी पड़ोसी चीन ने 1962 में तवांग पर हमला किया था जिसमें करीब 800 भारतीय सैनिक मारे गए थे और 1,000 सैनिकों को बंधक बना लिया गया था। चीन पिछले एक दशक से सीमा के करीब सैन्य ढांचों का निर्माण कर रहा है जिनमें नए राजमार्ग, सैन्य चौकियां, हेलीपैड और तिब्बत के पठार पर मिसाइल प्रक्षेपण स्थल शामिल हैं।

सैन्य सूत्रों के अनुसार, बर्फ से ढकी पर्वतीय सीमा पर चीन की ओर से गश्त दोगुनी करने और कई मौकों पर ‘‘अनजाने’’ में सीमा पार करने के जवाब में भारतीय सेना ने भी वास्तविक नियंत्रण रेखा पर गश्त तेज कर दी है।

करीब 14,000 लोगों की आबादी वाले इस शहर का केंद्र प्राचीन तवांग मठ है जिसका निर्माण 1680 में किया गया था और इसमें ज्यादातर बौद्ध मोनपा और तिब्बती लोग रहते हैं। कुछ नेपाली, मारवाड़ी, असमी और बंगाली निवासी भी यहां रहते हैं।

चीन के साथ सीमा पर तनाव के बावजूद और सीमा से महज तीन घंटे या कई बार उससे भी कम की दूरी पर स्थित तवांग अपनी सामरिक स्थिति से बेखबर दिखायी देता है। शहर में 2016 में पांच होटल थे और अब यह संख्या बढ़कर 20 हो गयी है । और भी होटलों का निर्माण किया जा रहा है।

तवांग वापस लौटे, लंदन में प्रशिक्षित वकील ल्हामो यांगजोम एक लघु फुटबॉल स्टेडियम बनाना चाहते हैं। उन्होंने ‘पीटीआई-’ से कहा, ‘‘कारोबार अच्छा चल रहा है। देश और विदेश में बड़े शहरों में जाने के बाद युवा अब घर लौट रहे हैं और उन्होंने नयी दुकानें, पर्यटक कंपनियां और होटल खोले हैं। मैं खुद फुटबॉल स्टेडियम बनाने पर विचार कर रहा हूं।’’

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