जरुरी जानकारी | सीमावर्ती देशों पर नियंत्रण से भारत में निवेश प्रवाह पर प्रभाव अस्थायी : मुख्य आर्थिक सलाहकार
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नयी दिल्ली, 14 अक्टूबर मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) केवी सुब्रमणियम ने बुधवार को कहा कि कुछ देशों की कंपनियों के मौकापरस्त अधिग्रहण रोकने को लेकर लगाये एक नियंत्रणों से भारत में स्टार्टअप को होने वाले निवेश प्रवाह पर अस्थायी प्रभाव पड़ेगा।
सरकार ने उन देशों की कंपनियों के निवेश पर नियंत्रण लगाए हैं, जिनका भारत के साथ सीमा पर तनाव है।
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उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (डीपीआईआईटी) ने अप्रैल में प्रेस नोट 3 जारी किया था। इसके अनुसार भारत की सीमा से लगने वाले देशों के व्यक्ति या कंपनियां सरकार की मंजूरी प्राप्त करने के बाद ही किसी क्षेत्र में निवेश कर सकती हैं।
इस निर्णय से चीन और हांगकांग जैसे क्षेत्रों से होने वाले विदेशी निवेश पर असर पड़ा है।
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उद्योग मंडल फिक्की के एक कार्यक्रम को वीडियो कांफ्रेन्सिंग के जरिये संबोधित करते हुए सुब्रमणियम ने कहा कि विभिन्न देशों खासकर भारत की सीमा से लगने वाले देशों से होने वाले प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष निवेश की जांच की जरूरत है।
उन्होंने कहा, ‘‘इसके परिणामस्वरूप स्टार्टअप के वित्त पोषण को लेकर कुछ प्रभाव पड़ेगा। लेकिन मुझे लगता है कि बड़ी संख्या में दूसरे देशों की निजी इक्विटी कंपनियां इस कमी को पूरा कर सकती हैं।’’
उनसे यह पूछा गया था कि क्या प्रेस नोट 3 का हांगकांग से होने वाले निवेश पर कोई प्रभाव पड़ेगा।
सीईए ने कहा कि अन्य देशों की निजी इक्विटी कंपनियों की स्टार्टअप में निवेश को लेकर रूचि है। ‘‘मेरे हिसाब से यह प्रभाव अस्थायी होने की उम्मीद है।’’
भारत को अप्रैल 2000 से दिसंबर 2019 के दौरान चीन से 2.34 अरब डॉलर (14,846 करोड़ रुपये) का निवेश प्राप्त हुआ।
ऋण शोधन और दिवाला प्रक्रिया के बारे में सुब्रमणियम ने कहा कि किसी भी अर्थव्यवस्था के लिये लंबे समय से चली आ रही पुरानी व्यवस्था की जगह नई और अनूठी चीजें लाना महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा, ‘‘दिवाला एवं ऋण शोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) प्रक्रिया एक उभरती प्रक्रिया है तथा इसे और बेहतर बनाने के लिये अभी भी गुंजाइश है।
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