देश की खबरें | तनिष्क का विज्ञापन : सांप्रदायिक कलह पर आधारित विषय वस्तुओं के प्रसारण पर नियमन के लिए याचिका दायर

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. तनिष्क के विज्ञापन में हाल में अंतरधार्मिक दंपति को दिखाने को लेकर हुए विवाद के बाद दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर सांप्रदायिक कलह से जुड़ी विषय वस्तु और नफरत भरे भाषण के प्रकाशन एवं प्रसारण को लेकर समाचार चैनलों के नियमन का आग्रह किया गया है।

एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, 27 अक्टूबर तनिष्क के विज्ञापन में हाल में अंतरधार्मिक दंपति को दिखाने को लेकर हुए विवाद के बाद दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर सांप्रदायिक कलह से जुड़ी विषय वस्तु और नफरत भरे भाषण के प्रकाशन एवं प्रसारण को लेकर समाचार चैनलों के नियमन का आग्रह किया गया है।

याचिका में कहा गया है कि टाटा ज्वैलरी ब्रांड के विज्ञापन से यह स्पष्ट निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि इसका उद्देश्य दो धार्मिक समूहों के बीच एकता और भाईचारे की भावना को दर्शाना था।

यह भी पढ़े | Nikita Tomar Murder Case: कॉलेज की छात्रा को गोली मारने वाला आरोपी तौसिफ ने कबूला अपना जुर्म, कहा- उसकी शादी और कहीं होने वाली थी इसलिए मारी गोली.

एक वकील की तरफ से दायर याचिका में कहा गया कि समाचार चैनल सुदर्शन टीवी ने 12 अक्टूबर को अपने कार्यक्रम ‘बिंदास बोल’ में विज्ञापन को ‘विज्ञापन जिहाद’ बताकर दो धार्मिक समूहों के बीच नफरत फैलाने का हरसंभव प्रयास किया गया।

सोशल मीडिया पर विज्ञापन की आलोचना के बाद कंपनी ने इसे वापस ले लिया था।

यह भी पढ़े | गुजराती फिल्म स्टार और पूर्व भाजपा विधायक नरेश कनोडिया का कोरोना से निधन.

याचिकाकर्ता वकील असगर खान ने अपनी याचिका में कहा कि केबल एवं टेलीविजन नेटवर्क्स (नियमन) कानून के कार्यक्रम संहिता के मुताबिक किसी भी ऐसे कार्यक्रम का प्रसारण नहीं होना चाहिए जिसमें ‘‘धर्म या समुदायों पर हमला हो या जिनमें धार्मिक समूहों की भावना को ठेस पहुंचाने वाले दृश्य या शब्द हों या जो धार्मिक वैमनस्यता को बढ़ावा देते हों।’’

इसने कहा, ‘‘यह कार्यक्रम (सुदर्शन टीवी का) केबल टेलीविजन कार्यक्रम संहिता का उल्लंघन करता है।’’

इसमें संबंधित अधिकारियों को निर्देश देने की मांग की गई कि ऐसी व्यवस्था बनाएं जिसमें समुदायों के बीच नफरत फैलाने वाली विषय वस्तु एवं विज्ञापनों पर रोक लगाई जा सके। साथ ही ऐसे विषय वस्तु एवं विज्ञापनों पर भी रोक लगाने की मांग की गई जो भारतीय संघ एवं समाज की भावनओं के विपरीत हैं।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)

Share Now

\