नयी दिल्ली, दो जनवरी पूर्व वित्त मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने सोमवार को कहा कि उच्चतम न्यालय के बहुमत के फैसले में इस सवाल का स्पष्ट जवाब नहीं मिला कि क्या नोटबंदी के उद्देश्य पूरा हुए।
उन्होंने यह दावा भी किया कहा कि ‘अल्पमत‘ के फैसले ने नोटबंदी में ‘अवैधता’ और ‘अनियमितताओं’ की ओर इशारा किया है।
चिदंबरम ने कहा कि अपने फैसले में न्यायालय ने सरकार को हल्की फटकार लगाई है।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ट्वीट किया, ‘‘उच्चतम न्यायालय जब एक बार किसी कानून को स्वीकृति दे दी तो हम उसे स्वीकार करने के लिए बाध्य है। बहरहाल, यह उल्लेख करना जरूरी है कि बहुमत के फैसले ने (नोटबंदी के) निर्णय के विवेक को सही नहीं ठहराया है और न ही बहुमत का फैसला इस निष्कर्ष पर पहुंचा है कि जिन उद्देश्यों की बात की गई थी वो पूरा हो गए।’’
उच्चतम न्यायालय की संविधान पीठ ने केंद्र सरकार के 2016 में 500 और 1000 रुपये की श्रृंखला वाले नोटों को बंद करने के फैसले को सोमवार को 4:1 के बहुमत के साथ सही ठहराया। पीठ ने बहुमत से लिए गए फैसले में कहा कि नोटबंदी की निर्णय प्रक्रिया दोषपूर्ण नहीं थी । हालांकि न्यायमूर्ति बी. वी. नागरत्ना ने सरकार के फैसले पर कई सवाल उठाए।
न्यायमूर्ति एस. ए. नज़ीर की अध्यक्षता वाली पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने कहा कि आर्थिक मामले में संयम बरतने की जरूरत होती है और अदालत सरकार के फैसले की न्यायिक समीक्षा नहीं कर सकती।
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