देश की खबरें | वर्ष 2015 के कोटकपूरा गोलीबारी कांड के आरोप पत्र में सुखबीर बादल का नाम ‘उत्पीड़न’: शिअद
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. शिरोमणि अकाली दल (शिअद) ने वर्ष 2015 के कोटकपूरा पुलिस फायरिंग मामले में दाखिल आरोप पत्र में पार्टी प्रमुख सुखबीर सिंह बादल को नामजद करने को ‘अभियोजन नहीं उत्पीड़न’ करार दिया। पार्टी ने शनिवार को कहा कि वह इसे अदालत में चुनौती देगी।
चंडीगढ़, 25 फरवरी शिरोमणि अकाली दल (शिअद) ने वर्ष 2015 के कोटकपूरा पुलिस फायरिंग मामले में दाखिल आरोप पत्र में पार्टी प्रमुख सुखबीर सिंह बादल को नामजद करने को ‘अभियोजन नहीं उत्पीड़न’ करार दिया। पार्टी ने शनिवार को कहा कि वह इसे अदालत में चुनौती देगी।
शिअद ने यह प्रतिक्रिया विशेष जांच टीम (एसआईटी) द्वारा वर्ष 2015 कोटकपूरा पुलिस फायरिंग मामले में फरीदकोट की अदालत में आरोप पत्र दाखिल करने के एक दिन बाद दी है। एसआईटी ने अपने आरोप पत्र में तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल, उस समय के उप मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल, पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) सुमेध सैनी और अन्य को नामजद किया है।
आरोप पत्र में सुखबीर बादल और सैनी पर फरीदकोट में धार्मिक ग्रंथ की बेअदबी की तीन घटनाओं में सरकार की नाकामी को छिपाने के लिए अवैध तरीके से अधिक बल प्रयोग की साजिश करने का ‘मास्टरमाइंड’ करार दिया गया है। वहीं सात हजार पन्नों के आरोप पत्र में प्रकाश सिंह बादल पर ‘ साजिश को अमलीजामा पहनाने में मदद करने’’ का आरोप लगाया गया है।
आरोप पत्र पर प्रतिक्रिया देते हुए शिअद नेताओं ने शनिवार को पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान से कहा कि वह संवेदनशील मामलों पर राजनीति नहीं करें। उन्होंने कहा कि राज्य की आम आदमी पार्टी (आप) सरकार ने सभी मोर्चों पर अपनी ‘नाकामी छिपाने’ के लिए ‘स्पष्ट रूप से प्रतिशोधात्मक’ आरोप पत्र दाखिल किया है।
पार्टी नेता प्रेम सिंह चंदूमाजरा, महेशिंदर सिंह ग्रेवाल और दलजीत सिंह चीमा ने एक बयान में कहा, ‘‘ शिअद अदालत की अवमानना सहित सभी विकल्पों पर विचार करेगी क्योंकि (पंजाब और हरियाणा) उच्च न्यायालय द्वारा पूर्व पुलिस महानिरीक्षक कुंवर विजय प्रताप की रिपोर्ट को खारिज किए जाने के साथ दिशानिर्देश दिए गए थे जिसका उल्लंघन किया गया है।’’
उन्होंने कहा कि मामले में दाखिल आरोप पत्र में बादल के नाम को शामिल करना ‘‘ अभियोजन नहीं उत्पीड़न है’’ और पार्टी ‘‘ पूर्वाग्रही, फर्जी मामले को कानून और जनता दोनों की अदालत में चुनौती देगी।’’
गौरतलब है कि यह मामला वर्ष 2015 में फरीदकोट में गुरु ग्रंथ साहिब के ‘बीर’ (प्रति) की चोरी, बेअदबी वाले पोस्टर लगाने और बारगढ़ी में पवित्र पुस्तक के फटे पन्ने मिलने से जुड़ा है। इसके खिलाफ फरीदकोट के कोटकपूरा में प्रदर्शन हुआ था और भीड़ को काबू करने के लिए पुलिस द्वारा चलाई गई गोलियों से दो लोगों गुरजीत सिंह और किशन भगवान सिंह की मौत हो गई थी जबकि कई अन्य घायल हुए थे।
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