देश की खबरें | पर्यावरण नियमों के उल्लंघन मामले में स्टोन क्रशर तीन महीने के भीतर जमा करें रिपोर्ट : एनजीटी

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नयी दिल्ली, 15 अप्रैल राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) ने जम्मू कश्मीर के राजौरी जिले में पर्यावरण नियमों के उल्लंघन मामले में समिति का गठन कर पत्थर तोड़ने वाली मशीन (स्टोन क्रशर) के संचालन के खिलाफ दर्ज एक याचिका पर रिपोर्ट मांगी है।

एनजीटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति एके गोयल की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि जिला मजिस्ट्रेट की रिपोर्ट से यह स्पष्ट है कि अवैध खनन द्वारा समर्थित स्टोन क्रशर के संचालन से गंभीर उल्लंघन हुया है, जिससे पर्यावरण को नुकसान पहुंचा है।

पीठ ने कहा "अवैध खनन और प्रदूषण को रोकने के लिये अब तक उठाए गये कदम 'अपर्याप्त' हैं। इसलिए उल्लंघनकर्ताओं को पिछले उल्लंघनों का जवाबदेह मानते हुए नये कदम उठाये गए हैं।''

पीठ में शामिल न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल और न्यायमूर्ति अरुण कुमार त्यागी ने कहा "गंभीर उल्लंघनों में नदी के प्रवाह को मोड़ना, जल स्तर को कम करना, सिंचाई/फसलों का नुकसान करना, पानी की गुणवत्ता को नुकसान पहुंचाना और यहां तक ​​कि इन संचालकों द्वारा बनाए गए गहरे गड्ढे में डूबने से हुई व्यक्ति की मौत का मामला भी शामिल है।"

प्राधिकरण राजौरी जिले में पर्यावरण नियमों के उल्लंघन में पत्थर तोड़ने वाली मशीनों के संचालन के खिलाफ ग्राम प्रधान आरती शर्मा द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रहा था।

याचिका में कहा गया है कि स्टोन क्रशर रिहायशी इलाकों और तवी नदी के करीब स्थित हैं और इनके द्वारा भूजल निकालने के लिए अवैध बोरवेल खोदे गए हैं।

एनजीटी द्वारा गठित समिति में जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति जनक राज कोतवाल, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी, जम्मू कश्मीर के सिंचाई सचिव समेत राजौरी के जिला मजिस्ट्रेट शामिल हैं।

पीठ ने कहा "समिति पहले से प्रस्तुत रिपोर्टों पर विचार करेगी, यदि आवश्यक होगा तो साइट का दौरा कर हितधारकों से बात की जाएगी। पीठ ने यहा भी कहा ''न्यायमूर्ति कोतवाल राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा भुगतान किया जाने वाला मानदेय स्वयं निर्धारित कर सकते हैं।'' इसके अलावा पीठ ने मामले की एक विस्तृत रिपोर्ट तीन महीने के अंदर ई-मेल के माध्यम से दायर करने का आदेश दिया।''

आरती की ओर से दायर याचिका में यह भी कहा गया है कि इस काम को करने के लिए ''आवश्यक पर्यावरणीय मंजूरी नहीं ली गई है। तवी नदी के तट पर भारी मशीनों से अवैध खनन किया जाता है। परिवहन के लिए वाहनों के उपयोग से वायु प्रदूषण होता है। इसके परिणामस्वरूप जल स्तर में कमी के कारण पेयजल और कृषि की उत्पादकता में कमी उत्पन्न हो रही है।''

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