विशाखापत्तनम/ नयी दिल्ली, सात मई आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में एक रासायनिक संयंत्र से गैस लीक होकर करीब पांच किलोमीटर के दायरे में गांवों में फैल गई, जिससे कम से कम 11 लोगों की मौत हो गई तथा लगभग 1,000 लोगों को सांस लेने में तकलीफ सहित अन्य दिक्कतें हो रही हैं । राज्य सरकार ने घटना की जांच के आदेश दिए हैं ।
विशाखापत्तनम के पास गोपालपत्तनम के तहत आने वाले आर आर वेंकटपुरम गांव में स्थित ‘एलजी पॉलिमर्स लिमिटेड’ के संयंत्र से स्टाइरीन गैस का रिसाव बुधवार देर रात करीब ढाई बजे शुरू हुआ, जिसके कुछ घंटों बाद कई लोग सड़क किनारे और नालों के पास बेहोशी की हालत में पड़े मिले। इसने बड़ी औद्योगिक आपदा के अंदेशे को बढ़ा दिया है।
अधिकारियों ने बताया कि मरने वालों में एक बच्चा और दो वे लोग भी शामिल हैं, जो जान बचाने के लिए भागने के दौरान कुएं में गिर गए थे।
वहीं, पुलिस ने बताया कि हादसे में मरने वालों की संख्या बढ़ सकती है क्योंकि कम से कम 20 लोग वेंटिलेटर पर हैं। इनके अलावा 246 लोगों का विशाखापत्तनम के किंग जॉर्ज अस्पताल में इलाज जारी है। गोपालपत्तनम के आर आर वेंकटपुरम गांव से करीब 800 लोगों को निकाल लिया गया और उनमें से ज्यादातर को सिर्फ प्राथमिक उपचार की जरूरत पड़ी।
ग्रामीण ने बताया कि मदद के लिये लोगों की चीख ने रात के सन्नाटे को चीर दिया और कई लोग नींद में ही बेहोश हो गए।
हालात का जायजा लेते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि उन्होंने गृह मंत्रालय और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अधिकारियों से बातचीत की है।
प्रधानमंत्री ने एक ट्वीट किया, ‘‘ मैं सभी की सुरक्षा और विशाखापत्तनम के लोगों की कुशलक्षेम की प्रार्थना करता हूं । ’’
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भी घटना में लोगों की मौत पर शोक व्यक्त कर बीमारों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की ।
राष्ट्रपति ने अपने ट्वीट में कहा, ‘‘ विशाखापत्तनम में एक रासायनिक संयंत्र में गैस रिसाव की घटना के समाचार से दुखी हूं जिसमें कई लोगों की मौत हो गई। मेरी संवेदनाएं पीड़ित परिवारों के साथ हैं। मैं इस घटना में बीमार लोगों के स्वस्थ्य होने और सभी की सुरक्षा की कामना करता हूं। ’’
कोविंद ने कहा, ‘‘ मुझे विश्वास है कि प्रशासन स्थिति को जल्द से जल्द नियंत्रण में लाने के लिये हर संभव प्रयास करेगा।’’
राष्ट्रीय आपदा मोचन बल और एनडीएमए के अधिकारियों ने दिल्ली में संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में कहा कि हादसे में 11 लोगों की मौत हुई है और करीब 1000 लोग इससे प्रभावित हुए हैं।
राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) के महानिदेशक एस एन प्रधान ने कहा कि संयंत्र से रिसाव अब बहुत कम हो गया है लेकिन एनडीआरएफ कर्मी इसके पूरी तरह बंद होने तक मौके पर मौजूद रहेंगे।
उन्होंने बताया कि लॉकडाउन के कारण फैक्टरी बंद थी। उसमें दोबारा काम शुरू करने के लिये तैयारी की जा रही थी।
प्रधान ने कहा कि संयंत्र के तीन किमी के दायरे से 200 से 250 परिवारों के लगभग 500 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है।
प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) डी गौतम स्वांग ने बताया कि मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं।
सवांग ने कहा, "गैस कैसे लीक हुई और संयंत्र में न्यूट्रलाइजर रिसाव को रोकने में क्यों कारगर साबित नहीं हुआ, इसकी जांच की जाएगी। हालांकि, स्टाइरीन एक जहरीली गैस नहीं है और ज्यादा मात्रा में सांस के जरिये शरीर के भीतर जाने पर ही जानलेवा हो सकती है।"
वहीं, मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिवार को एक-एक करोड़ रुपये की अनुग्रह राशि देने का भी एलान किया।
स्टाइरीन का इस्तेमाल सिंथेटिक रबर और रेजिन बनाने में किया जाता है। यह गैस केंद्रीय तंत्रिका तंत्र, गले, त्वचा, आंखों और शरीर के कुछ अन्य हिस्सों को प्रभावित करती है।
हालांकि, रिसाव के स्रोत पर सुबह में ही काबू पा लिया गया, लेकिन इसका प्रभाव कई घंटों के बाद भी देखा गया।
दिन होने पर इस त्रासदी के पूरे प्रभाव का पता लगा।
प्राप्त सूचना के अनुसार सबने अपनी-अपनी तरह से मदद करने की कोशिश की। किसी ने प्राथमिक उपचार दिया तो किसी ने पानी, कोई पीड़ितों के चेहरे पोछ रहा था। प्रभावित लोगों को ऑटो और दो पहिया वाहनों से अस्पताल पहुंचाया गया। सरकारी कर्मियों और अन्य ने भी जैसे भी हो सकता था, मदद करने की कोशिश की।
लोग सड़क किनारे और नालों के पास बेहोश पड़े हुए थे, जो स्थिति की गंभीरता को बयान करता है।
रिसाव का नतीजा सैड़कों ग्रामीणों, जिनमें अधिकतर बच्चे हैं, को भुगतना पड़ा। उन्हें आंखों में जलन, सांस लेने में तकलीफ, जी मिचलाना और शरीर पर लाल चकत्ते पड़ने जैसी परेशानियां हुईं।
जो लोग कुछ बोलने की स्थिति में थे उन्होंने बताया कि क्या हुआ था। लोग फुटपाथ पर बैठकर सुबह के घटनाक्रम को बयां करते देखे गए।
गैस के रिसाव की चपेट में आकर मवेशी और पक्षी भी अचेत हो गए।
इस घटना ने 1984 के भोपाल गैस त्रासदी के मंजर को ताजा कर दिया जिसमें 3000 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी और बड़ी संख्या में लोग जीवन भर के लिए अपंग हो गए थे।
बचाव अभियान के लिए गए कई पुलिस कर्मियों ने भी सांस लेने में दिक्कत, आंखों में जलन की शिकायत की और उनमें से कुछ बेहोश भी हो गए।
सूत्रों ने बताया कि संयंत्र के 20 कर्मी सुरक्षा प्रोटोकॉल से अच्छी तरह वाकिफ थे और उन्होंने उचित कदम उठाए थे जिस वजह से वे प्रभावित नहीं हुए।
राज्य के उद्योग मंत्री मेकपति गौतम रेड्डी ने बताया कि एलजी पॉलीमर्स इकाई को लॉकडाउन के बाद बृहस्पतिवार को खुलना था।
उन्होंने कहा, ‘‘ हम (दक्षिण कोरियाई) कंपनी के शीर्ष प्रबंधन से संपर्क करने कोशिश कर रहे हैं... हमारी पहली प्राथमिकता रिसाव को रोकने और प्रभावित लोगों का उचित इलाज सुनिश्चित करने की है।’’
वृहत विशाखापत्तनम नगर निगम ने ट्विटर पर परामर्श डालकर लोगों से गीला कपड़ा या मास्क का इस्तेमाल करने, केला और गुड़ खाने और दूध का सेवन करने को कहा, ताकि गैस के असर को खत्म किया जा सके।
संयंत्र चलाने वाली कंपनी एलजी केम ने कहा कि वह निवासियों और कर्मचारियों की मदद करने के लिये भारतीय अधिकारियों के साथ सहयोग कर रही है।
एलजी केम ने एक बयान में कहा, "गैस रिसाव अब नियंत्रण में है, लेकिन लीक हुई गैस से मितली और चक्कर आ सकती है, इसलिए हम उचित उपचार सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं।"
कंपनी ने कहा कि लॉकडाउन की वजह से संयंत्र बंद था। इस हादसे में उसके किसी भी कर्मचारी की मौत नहीं हुई है।
रिसाव को कंपनी के कर्मचारियों ने महसूस किया और उन्होंने शोर मचाया। वे फैक्टरी को चालू करने के लिये मशीन का निरीक्षण कर रहे थे।
विशेषज्ञों ने गैस के रिसाव को नियंत्रित करने और न्यूट्रलाइज करने की कोशिश की।
इस बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गैस रिसाव की घटना को परेशान करने वाला बताया है।
उन्होंने कहा, ‘‘विशाखापत्तनम की घटना परेशान करने वाली है। हम निरंतर स्थिति पर नजर रख रहे हैं।’’
मुख्यमंत्री कार्यालय ने ट्वीट किया कि जगन मोहन रेड्डी विशाखात्तनम में किंग जॉर्ज अस्पताल जाएंगे जहां प्रभावित लोगों का इलाज चल रहा है।
घटना में हुई जान हानि पर उपराष्ट्रपति एम वेकैंया नायडू, तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव, भाजपा प्रमुख जेपी नड्डा और कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी दुख जताया है।
इस घटना का विशाखापत्तनम से ट्रेनों की आवाजाही पर भी असर हुआ है। कम से कम नौ श्रमिक स्पेशल ट्रेनों का विभिन्न स्थानों पर परिचालन बाधित हुआ है।
उत्तर सिम्हाचलम स्टेशन पर भी कर्मचारियों ने आंखों में जलन और सांस लेने में तकलीफ की शिकायत की। इस स्टेशन पर ट्रेनों का परिचालन सुबह आठ बजकर 35 मिनट से दोपहर 12 बजे तक बाधित हुआ।
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