देश की खबरें | अध्ययन ने कोविड की दूसरी लहर में प्रदूषण और श्मशान में जले जैव ईंधन के बीच संबंध स्थापित किया

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. एक नवीनतम अध्ययन में कहा गया है कि दिल्ली में कोविड-19 महामारी की पिछले साल मार्च से मई महीने के बीच आई दूसरी लहर के दौरान लॉकडाउन के बावजूद असमान्य तरीके से प्रदूषण के उच्च स्तर का संबंध श्मशानों में असाधारण रूप से जलाए गए जैव ईंधन और धूल भरी आंधी की बढ़ी बारम्बरता से हो सकता है।

नयी दिल्ली, 10 अप्रैल एक नवीनतम अध्ययन में कहा गया है कि दिल्ली में कोविड-19 महामारी की पिछले साल मार्च से मई महीने के बीच आई दूसरी लहर के दौरान लॉकडाउन के बावजूद असमान्य तरीके से प्रदूषण के उच्च स्तर का संबंध श्मशानों में असाधारण रूप से जलाए गए जैव ईंधन और धूल भरी आंधी की बढ़ी बारम्बरता से हो सकता है।

इस अध्ययन को बेंगलुरु स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस साइंस, दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी), पुणे स्थित भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान, उत्कल विश्वविद्यालय और इंद्रप्रस्थ सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान के अनुसंधानकर्ताओं ने मिलकर किया है। इस अनुसंधानपत्र को बहु विषयी जर्नल केमोस्फीयर में प्रकाशित किया गया है।

अनुसंधान दल में वैज्ञानिक और वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक गुफरान बेग और डीपीसीसी के सचिव सदस्य केएस जयचंद्रन शामिल थे।

अनुसंधानकर्ताओं ने भारत के पहले वायु गुणवत्ता पूर्वानुमान ढांचा ‘सफर’ का इस्तेमाल कर लॉकडाउन के बावजूद खराब वायु गुणवत्ता का कारण बताया है।

अध्ययन में संकेत किया गया है कि गणना नहीं किए गए स्रोतों ने वायु प्रदूषण के उच्च स्तर में अहम भूमिका निभाई। उत्सर्जन के गुप्त स्रोतों के बारे में माना जा रहा है कि वे श्मशान भूमि में जल रहे अतिरिक्त जैव ईंधन हैं, जिन्हें मॉडल में शामिल नहीं किया जा सका।

मॉडल में यह भी स्थापित किया गया कि उत्तर पश्चिमी हवाएं रेगिस्तानी इलाकों से दिल्ली में धूल कण लेकर आई, जिससे लॉकडाउन के दौरान वातावरण में सूक्ष्म कणों का स्तर बढ़ा।

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