ऑकलैंड, 24 अप्रैल (द कन्वरसेशन) अगर आप अचानक अपने हाथ-पैर हिलाने, चलने-फिरने या बोलने में असमर्थता महसूस करने लगें, तो आप शायद इसे ‘मेडिकल इमरजेंसी’ समझकर तुरंत अस्पताल का रुख करेंगे।
अब कल्पना कीजिए कि अस्पताल में डॉक्टर आपकी कुछ जांच कराएं और रिपोर्ट देखने के बाद कहें, “अच्छी खबर है! आपकी सभी रिपोर्ट सामान्य है, किसी भी जांच में कोई भी दिक्कत सामने नहीं आई है। सब कुछ ठीक है। आप घर जा सकते हैं!” हालांकि, आपको लक्षणों में कोई राहत महसूस नहीं होती और आप इस डरावने एहसास से घिरने लगते हैं कि आप जल्द बिस्तर पकड़ सकते हैं।
दुर्भाग्य से, ‘फंक्शनल न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर’ (कार्यात्मक तंत्रिका संबंधी विकार) से पीड़ित कई लोग इसी तरह के अनुभव से दो-चार होते हैं। कई बार तो उन्हें यह भी सुनना पड़ता है कि वे लक्षणों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहे हैं या झूठ बोल रहे हैं।
तो आइए जानें कि ‘फंक्शनल न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर’ क्या है और इसकी पहचान एवं इलाज इतना मुश्किल क्यों है?
स्ट्रोक समझने की गलती
-तंत्रिका तंत्र संबंधी विकार (न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर) तंत्रिका तंत्र के काम करने के तरीके को प्रभावित करते हैं। तंत्रिका तंत्र की कोशिकाएं मस्तिष्क और शरीर के अन्य हिस्सों के बीच संदेशों के आदान-प्रदान के लिए जिम्मेदार होती हैं, जिससे व्यक्ति उठने, बैठने, चलने, बोलने, देखने, सुनने, स्वाद महसूस करने और खाना पचाने जैसे अहम काम कर पाता है।
आम लोगों को ‘फंक्शनल न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर’ के लक्षण स्ट्रोक, मिर्गी या ‘मल्टीपल स्क्लेरोसिस’ के समान लग सकते हैं।
‘मल्टीपल स्क्लेरोसिस’ केंद्रीय तंत्रिका तंत्र से जुड़ा एक विकार है, जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी में मौजूद तंत्रिका कोशिकाओं के सुरक्षात्मक आवरण (मायलिन) पर हमला करती है, जिससे मस्तिष्क और शरीर के बाकी हिस्सों के बीच संदेशों का आदान-प्रदान प्रभावित होता है।
स्ट्रोक, मिर्गी या ‘मल्टीपल स्क्लेरोसिस’ के विपरीत ‘फंक्शनल न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर’ के लक्षण तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करने वाली क्षति या विकार का नतीजा नहीं होते हैं। इसका मतलब यह है कि ‘फंक्शनल न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर’ सामान्य मस्तिष्क स्कैन और अन्य जांच में पकड़ में नहीं आते।
‘फंक्शनल न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर’ मस्तिष्क से जुड़ी विभिन्न प्रणालियों के बीच सूचनाओं के प्रसंस्करण की प्रक्रिया प्रभावित होने के कारण उभरते हैं। सरल में कहें तो ये मस्तिष्क के हार्डवेयर नहीं, सॉफ्टवेयर से जुड़े विकार होते हैं।
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