नयी दिल्ली, 11 सितंबर उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को तेलंगाना उच्च न्यायालय के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के विधायक बी कृष्ण मोहन रेड्डी के गडवाल विधानसभा सीट से निर्वाचन को अमान्य घोषित कर दिया गया था।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता की पीठ ने भाजपा नेता डी.के. अरुणा को नोटिस जारी किया, जिन्हें उच्च न्यायालय ने रेड्डी का निर्वाचन रद्द करने के बाद निर्वाचित घोषित कर दिया था, और चार हफ्तों के अंदर उनका (अरुणा का) जवाब मांगा।
उच्च न्यायालय ने 24 अगस्त को रेड्डी के निर्वाचन को अमान्य घोषित कर दिया था और नामांकन पत्र के साथ अपनी संपत्ति के बारे में झूठा शपथपत्र दाखिल करने के लिए उन पर 2.5 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया था।
अदालत ने अरुणा को पूर्व प्रभाव से, दिसंबर 2018 की तारीख से निर्वाचित घोषित किया था। साथ ही, रेड्डी को उन्हें मुकदमे के खर्च के रूप में 50,000 रुपये अदा करने का भी निर्देश दिया था।
अरुणा ने 2018 का विधानसभा चुनाव कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में लड़ा था और वह हार गई थीं। रेड्डी के चुनाव जीतने के बाद, अरुणा (जो दूसरे स्थान पर रही थीं) ने उनके खिलाफ एक चुनाव याचिका दायर की थी। बाद में, वह भाजपा में शामिल हो गईं और अभी वह पार्टी की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं।
अरुणा ने उच्च न्यायालय में दावा किया था कि बीआरएस विधायक ने तेलंगाना के महबूबनगर जिले में पुदुर गांव में अपने स्वामित्व वाली 24.09 एकड़ भूमि का विवरण शपथपत्र में नहीं दिया था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि रेड्डी ने अपनी पत्नी के नाम से मौजूद बैंक खातों का विवरण भी नहीं दिया था।
रेड्डी ने उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ शीर्ष न्यायालय का रुख किया था।
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