देश की खबरें | मासिक चक्र संबंधी स्वास्थ्य योजनाओं को लागू करने के लिए राज्य जिम्मेदार हैं : केन्द्र

नयी दिल्ली, एक अप्रैल केन्द्र सरकार ने उच्चतम न्यायालय को बताया कि वह बच्चियों और किशोरियों को मासिक चक्र के दौरान बेहतर ‘स्वच्छता’ मुहैया कराने को प्रतिबद्ध है लेकिन स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी राज्य सरकारों की है क्योंकि जन स्वास्थ राज्य का विषय है।

शीर्ष अदालत में दाखिल हलफनामे में स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि उसने जागरुकता और प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किए हैं तथा देश भर में लड़कियों को आवश्यक सुविधाएं मुहैया करायी हैं।

मंत्रालय ने कहा, ‘‘यह सूचित किया जाता है कि जन स्वास्थ्य राज्य का विषय है और स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराना संबंधित राज्य सरकारों की जिम्मेदारी है।’’

मंत्रालय ने कहा, ‘‘मासिक चक्र से जुड़ी स्वास्थ्य योजनाओं को लागू करने के लिए केन्द्र सरकार या उसकी संस्थाएं जिम्मेदार नहीं हैं; यह तथ्य है कि योजनाओं को लागू करना राज्यों और उनकी एजेंसियों की जिम्मेदारी है।’’

मंत्रालय ने कहा कि केन्द्र सरकार किशोरियों और बच्चियों को मासिक चक्र के दौरान बेहतर स्वच्छता मुहैया कराने के लिए प्रतिबद्ध है और उन्हें आवश्यक संसाधान उपलब्ध करा रही है।

यह हलफनामा कांग्रेस नेता जया ठाकुर की जनहित याचिका पर दाखिल किया गया था। ठाकुर ने अदालत से अनुरोध किया था कि वह देशभर के स्कूलों में पढ़ने वाली छठवीं से 12वीं कक्षा तक की बच्चियों को नि:शुल्क सैनिटरी पैड उपलब्ध कराने का निर्देश जारी करे।

मंत्रालय ने कहा कि मासिक चक्र और मासिक चक्र के दौरान की बातें वर्जना से भरी पड़ी हैं। इस दौरान भारत में बच्चियों से लेकर महिलाओं तक पर तमाम सामाजिक-सांस्कृतिक पाबंदियां होती हैं और ना सिर्फ सैनिटरी पैड तक उनकी पहुंच सीमित है बल्कि उन्हें सुरक्षित स्वच्छता सुविधाएं भी नहीं मिलती हैं।

मंत्रालय ने कहा, ‘‘इतना ही नहीं, परंपरागत रूप से पैड के रूप में पुराने कपड़ों का बार-बार उपयोग करना, राख या पुआल का उपयोग करना शामिल है, इससे ना सिर्फ मासिक चक्र के दौरान स्वच्छता प्रभावित होती है बल्कि इससे महिलाओं के प्रजनन पर भी दीर्घकालीक कुप्रभाव होता है।’’

हलफनामे में केन्द्र ने कहा, ‘‘सरकार किशोरियों/बच्चियों के बीच मासिक चक्र के दौरान स्वच्छता पर जागरुकता बढ़ाने, उनका आत्मसम्मान बढ़ाने और उन्हें सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में भी लड़कियों को अच्छी गुणवत्ता वाले सैनिटरी पैड उपलब्ध कराने की दिशा में काम कर रही है।’’

ठाकुर ने अपनी याचिका में कहा है कि गरीब पृष्ठभूमि से आने वाली 11 से 18 साल की लड़कियों को शिक्षा प्राप्त करने में भी परेशानी होती है और संविधान के अनुच्छेद 21ए के तहत प्राप्त अधिकारों का उल्लंघन होता है।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)