विदेश की खबरें | श्रीलंका के राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे ने देश छोड़ा, देश में आपातकाल लगाया गया

कोलंबो, 13 जुलाई गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहे श्रीलंका में प्रदर्शनकारियों के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के आधिकारिक आवास पर कब्जा जमाने के बीच बुधवार को देश के राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे सेना के एक विमान से देश छोड़कर मालदीव चले गए।

राजपक्षे (73) ने मालदीव से ही प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे को देश का कार्यवाहक राष्ट्रपति नियुक्त किया है। संसद अध्यक्ष महिंदा यापा अभयवर्दने ने घोषणा की कि राष्ट्रपति राजपक्षे ने अपने विदेश प्रवास के दौरान कामकाज संभालने के लिए प्रधानमंत्री विक्रमसिंघे की नियुक्ति की है। उन्होंने बताया कि यह संविधान के अनुच्छेद 37(1) के तहत किया गया है।

अभयवर्द्धने ने यह भी कहा कि राष्ट्रपति राजपक्षे ने उन्हें टेलीफोन पर सूचित किया है कि वह वादे के अनुसार आज (बुधवार) इस्तीफा दे देंगे। उन्होंने कहा कि नये राष्ट्रपति के लिए मतदान 20 जुलाई को होगा।

कोलंबो में ‘फ्लावर स्ट्रीट’ पर विक्रमसिंघे, जोकि अब कार्यवाहक राष्ट्रपति हैं, के कार्यालय के समीप प्रदर्शनकारियों के एकत्रित होने के बाद विक्रमसिंघे ने देश में आपातकाल लगाने की घोषणा की। साथ ही पश्चिमी प्रांत में कर्फ्यू लगाया गया है।

राजपक्षे के मालदीव जाने के बाद राष्ट्रपति नियुक्त किये गये विक्रमसिंघे ने अपने पहले टेलीविजन भाषण में कहा, ‘‘मैं आपातकाल और कर्फ्यू लागू कर रहा हूं।’’

उन्होंने सैन्य कमांडरों और पुलिस प्रमुख को आदेश दिया है कि व्यवस्था बहाल करने के लिए जो कुछ जरूरी है, किया जाए। विक्रमसिंघे ने कहा कि सशस्त्र बलों के प्रमुखों की एक समिति को यह काम करने की जिम्मेदारी दी गयी है जिसमें राजनीतिक हस्तक्षेप बिल्कुल नहीं होगा।

उन्होंने कहा कि खुफिया जानकारी के अनुसार प्रदर्शनकारियों की योजना उनके कार्यालय और संसद पर कब्जा करने की थी जिसके बाद आपातकाल लगाना पड़ा।

विक्रमसिंघे ने कहा, ‘‘राष्ट्रपति के देश छोड़कर जाने और नये राष्ट्रपति के चुनाव के लिए कदम उठाये जाने के बावजूद कुछ प्रदर्शनकारी समूहों ने प्रधानमंत्री कार्यालय पर कब्जे की योजना बनाई और राष्ट्रपति को मालदीव जाने के लिए वायु सेना का विमान उपलब्ध कराने पर वायु सेना के कमांडर के आवास को घेर लिया। उन्होंने नौसेना के कमांडर और सैन्य कमांडर के आवास को भी घेरने का फैसला किया। इन समूहों ने देश को अपने नियंत्रण में लेने की कोशिश की।’’

इस बीच, प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति राजपक्षे के देश छोड़कर मालदीव चले जाने की खबरें आने के बाद ‘फ्लावर स्ट्रीट’ पर विक्रमसिंघे के कार्यालय की ओर कूच करते हुए उनसे इस्तीफा देने की मांग की। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को खदेड़ने के लिए आंसू गैस के गोले भी दागे लेकिन इसके बावजूद वे अवरोधकों को हटाकर प्रधानमंत्री के कार्यालय में घुस गए।

देश के सरकारी टेलीविजन चैनल ‘रूपवाहिनी’ ने बुधवार को प्रसारण निलंबित कर दिया क्योंकि प्रदर्शनकारियों ने इसकी इमारत पर धावा बोल दिया। हालांकि, बाद में चैनल ने प्रसारण बहाल किया। रूपवाहिनी द्वारा प्रसारण निलंबित किए जाने के कुछ देर बाद श्रीलंका के एक और सरकारी टीवी चैनल ने प्रसारण रोक दिया।

इससे पहले दिन में, श्रीलंका की वायु सेना ने एक संक्षिप्त बयान में बताया कि 73 वर्षीय राजपक्षे, अपनी पत्नी और दो सुरक्षा अधिकारियों के साथ सेना के एक विमान में देश छोड़कर चले गए हैं।

बयान में कहा गया है, ‘‘सरकार के अनुरोध पर और संविधान के तहत राष्ट्रपति को मिली शक्तियों के अनुसार, रक्षा मंत्रालय की पूर्ण स्वीकृति के साथ राष्ट्रपति, उनकी पत्नी और दो सुरक्षा अधिकारियों को 13 जुलाई को कातुनायके अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे से मालदीव रवाना होने के लिए श्रीलंकाई वायु सेना का विमान उपलब्ध कराया गया।’’

ऐसा बताया जा रहा है कि राजपक्षे नयी सरकार द्वारा गिरफ्तार किए जाने की आशंका के चलते इस्तीफा देने से पहले विदेश जाना चाहते थे।

राजपक्षे ने शनिवार को घोषणा की थी कि वह बुधवार को इस्तीफा देंगे। उन्होंने गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहे श्रीलंका में प्रदर्शनकारियों के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के आधिकारिक आवास पर कब्जा जमाने के बाद यह घोषणा की थी।

‘बीबीसी’ की एक खबर में कहा गया है कि वह स्थानीय समयानुसार देर रात लगभग तीन बजे मालदीव की राजधानी माले पहुंचे।

यहां सूत्रों ने मालदीव के अधिकारियों के हवाले से बताया कि गत रात वेलाना हवाई अड्डे पर मालदीव सरकार के प्रतिनिधियों ने राजपक्षे की अगवानी की। उन्हें पुलिस की सुरक्षा में अज्ञात स्थान पर ले जाया गया।

हालांकि, मालदीव की सरकार ने राजपक्षे के देश पहुंचने के संबंध में कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है।

मालदीव की राजधानी माले में सूत्रों ने बताया कि राजपक्षे की देश छोड़कर मालदीव जाने में मालदीव की संसद के अध्यक्ष और पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद ने मदद की है।

सूत्रों ने बताया कि मालदीव सरकार का तर्क है कि राजपक्षे अब भी श्रीलंका के राष्ट्रपति हैं और उन्होंने इस्तीफा नहीं दिया है या किसी उत्तराधिकारी को अपनी शक्तियां नहीं सौंपी हैं इसलिए अगर वह मालदीव आना चाहते हैं तो इससे मना नहीं किया जा सकता है।

मालदीव के संसद सचिवालय के संचार निदेशक हसन जिआउ ने कहा कि संसद को इस संबंध में कोई जानकारी नहीं है।

टीवी समाचार चैनलों पर प्रसारित खबरों के अनुसार, राजपक्षे के साथ 13 लोग मालदीव गए हैं। वे एएन32 विमान से मालदीव पहुंचे।

खबरों के अनुसार, मालदीव में नागरिक उड्डयन प्राधिकरण ने देश में किसी सैन्य विमान के उतरने के शुरुआती अनुरोधों को ठुकरा दिया था लेकिन बाद में अध्यक्ष नशीद के आग्रह पर विमान को उतरने की अनुमति दी गई।

मालदीव में सूत्रों के हवाले से ‘डेली मिरर’ ने एक रिपोर्ट में कहा कि राजपक्षे सिंगापुर के लिए रवाना हो सकते हैं।

राजपक्षे मालदीव से किसी अन्य देश जा सकते हैं, जिसके बारे में अभी जानकारी नहीं है।

उधर, श्रीलंका में भारतीय उच्चायोग ने बुधवार को मीडिया में आयी उन खबरों को ‘‘निराधार’’ बताया कि उसने राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे के देश छोड़कर मालदीव जाने में मदद की है।

उसने कहा, ‘‘यह दोहराया जाता है कि भारत लोकतांत्रिक माध्यमों और मूल्यों, स्थापित लोकतांत्रिक संस्थानों और संवैधानिक रूपरेखा के जरिए समृद्धि एवं प्रगति की आकांक्षाओं को पूरा करने में श्रीलंका के लोगों का सहयोग करता रहेगा।’’

वहीं, राजपक्षे के देश छोड़ने की खबरें आने के बाद उत्साहित भीड़ सिंहली में ‘‘संघर्ष की जीत’’ और ‘‘गो होम गोटा’’ के नारे लगाते हुए गाले फेस ग्रीन में एकत्रित हो गयी।

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