नयी दिल्ली, छह दिसंबर राष्ट्रीय राजधानी के प्रसिद्ध ‘डियर पार्क’ की ‘मिनी चिड़ियाघर’ के रूप में मान्यता रद्द होने के बाद फिलहाल चित्तिदार हिरण वहीं पर बने रहेंगे।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने अधिकारियों से चित्तिदार हिरणों को स्थानांतरित करने के संबंध में यथास्थिति बनाए रखने का बुधवार को आदेश दिया।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनमोहन की अध्यक्षता वाली पीठ ने अधिकारियों से केंद्रीय प्राणिउद्यान प्राधिकरण (सीजेडए) के फैसले पर रोक लगाने का अनुरोध करने वाली याचिका पर जवाब देने को कहा। साथ ही, सुझाव दिया कि कम से कम 50 हिरणों को पार्क में रखा जाए तथा शेष को दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) के नियंत्रण वाले हरित क्षेत्रों या यहां ‘रिज’ (वन क्षेत्र) में भेजा जा सकता है।
न्यायमूर्ति मनमोहन और न्यायमूर्ति मिनी पुष्करणा की पीठ ने कहा, ‘‘राजस्थान के जंगलों में बहुत अधिक तेंदुए हैं। वे (चित्तिदार हिरण) वहां नहीं बच पाएंगे। कम से कम 50 हिरण को (पार्क में) बनाये रखा जाये। बच्चे यहां (डियर पार्क में) कम से कम कुछ हिरण तो देख सकेंगे।’’
अदालत ने कहा, ‘‘इस बीच, यथास्थिति बनाए रखी जाये। हिरणों को स्थानांतरित नहीं किया जाये।’’
दक्षिण दिल्ली के हौजखास इलाके में स्थित पार्क को आधिकारिक तौर पर ‘ए एन झा डियर पार्क’ के नाम से जाना जाता है। यह डीडीए के अधिकार क्षेत्र में आता है।
सीजेडए ने आठ जून को ‘डियर पार्क’ की ‘मिनी चिड़ियाघर’ के रूप में मान्यता रद्द करने का आदेश जारी किया था।
विषय की अगली सुनवाई जनवरी में की जायेगी।
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