देश की खबरें | सपा ने आदित्यनाथ पर निशाना साधा, कहा : सांप्रदायिक हिंसा की 'साजिश' नाकाम की जानी चाहिए
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. हाथरस की घटना को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार और विपक्षी नेताओं के बीच नए सिरे से वाकयुद्ध शुरू होने के बीच सपा के वरिष्ठ नेता राम गोविंद चौधरी ने आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपनी पार्टी के लोगों को उकसा रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि "जाति और सांप्रदायिक हिंसा की साजिश" को नाकाम किया जाना चाहिए।
बलिया (उप्र), पांच अक्टूबर हाथरस की घटना को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार और विपक्षी नेताओं के बीच नए सिरे से वाकयुद्ध शुरू होने के बीच सपा के वरिष्ठ नेता राम गोविंद चौधरी ने आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपनी पार्टी के लोगों को उकसा रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि "जाति और सांप्रदायिक हिंसा की साजिश" को नाकाम किया जाना चाहिए।
एक दिन पहले ही मुख्यमंत्री ने हाथरस की घटना को लेकर अपनी सरकार पर विपक्ष के लगातार हमलों को लेकर उनकी आलोचना की थी और आरोप लगाया था कि वे विकास को बाधित करने तथा दंगा भड़काने के षड्यंत्र में लिप्त हैं।
उत्तर प्रदेश विधानसभा में विपक्ष के नेता राम गोविन्द चौधरी ने सोमवार को एक बयान में आरोप लगाया, ‘‘ प्रदेश को बीमार राज्य बनाने के बाद, आदित्यनाथ अपने पुराने तरीकों पर लौट रहे हैं। राज्य के लोगों को सतर्क रहना चाहिए और भाईचारा और सौहार्द बनाए रखना चाहिए। राज्य को दंगों से बचाने के लिए समाजवादी लोगों को बलिदान देने के लिए तैयार होना चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री अपनी असफलताओं को छिपाने के लिए, अपने कार्यकर्ताओं को उकसा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जातीय और सांप्रदायिक हिंसा की साजिश को नाकाम किया जाना चाहिए।
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चौधरी ने बयान में कहा कि प्रदेश में बहन—बेटियों पर अत्याचार और पुलिस की बर्बरता के खिलाफ आवाज उठाये जाने पर मुख्यमंत्री विपक्ष पर जातीय और साम्प्रदायिक दंगा भड़काने की साजिश का आरोप लगा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी और अन्य विपक्षी दल आम लोगों की आवाज मुख्यमंत्री तक पहुंचाना चाहते हैं, लेकिन वह इस आवाज को सुनना नहीं चाहते। उन्होंने कहा, ‘‘योगी सरकार आम लोगों की आवाज को दमन और गिरफ्तारी के बल पर कुचलने की कोशिश में लगी हुई है।’’
सपा नेता ने दावा किया कि ‘‘मुख्यमंत्री ने खुद पर दर्ज दंगे तथा अन्य आरोपों के गम्भीर मुकदमों को मुख्यमंत्री बनने के बाद खुद ही वापस नहीं लिया होता तो वह आज इस बड़ी कुर्सी की जगह कानून की गिरफ्त में होते।’’
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