मुंबई, पांच मार्च समाजवादी पार्टी (सपा) के विधायक अबू आसिम आजमी को मुगल बादशाह औरंगजेब की प्रशंसा करने वाली टिप्पणी के कारण बुधवार को महाराष्ट्र विधानसभा से 26 मार्च को समाप्त होने वाले बजट सत्र की शेष अवधि के लिये निलंबित कर दिया गया।
आजमी ने उनके साथ नाइंसाफी होने का दावा करते हुए कहा कि टिप्पणी वापस लेने के बावजूद उनके खिलाफ यह कार्रवाई की गयी।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी से आजमी की टिप्पणी पर रुख स्पष्ट करने को कहा तथा मांग की कि मुगल शासक का महिमामंडन करने के लिए उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया जाना चाहिए।
राज्य के मंत्री चंद्रकांत पाटिल ने बुधवार को सदन में शेष अवधि के लिये आजमी के निलंबन का प्रस्ताव पेश किया।
सत्ता पक्ष के सदस्यों ने कहा कि औरंगजेब की प्रशंसा में बयान देना मराठा राजा छत्रपति शिवाजी महाराज और उनके बेटे छत्रपति संभाजी महाराज का अपमान है।
प्रस्ताव ध्वनिमत से पारित किया गया।
पाटिल ने कहा, “औरंगजेब की प्रशंसा और संभाजी महाराज की आलोचना करने वाली आजमी की टिप्पणियां एक विधानसभा के सदस्य को शोभा नहीं देती हैं और यह विधानसभा का अपमान है।”
सपा की महाराष्ट्र इकाई के अध्यक्ष आजमी ने कहा था कि औरंगजेब के शासनकाल के दौरान भारत की सीमा अफगानिस्तान और बर्मा (म्यांमा) तक पहुंच गई थी।
मुंबई के मानखुर्द शिवाजी नगर निर्वाचन क्षेत्र से विधायक आजमी ने दावा किया था, “हमारी जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) (विश्व जीडीपी का) 24 प्रतिशत थी और भारत को (औरंगजेब के शासनकाल के दौरान) सोने की चिड़िया कहा जाता था।”
औरंगजेब और छत्रपति संभाजी महाराज के बीच लड़ाई के बारे में पूछे जाने पर आजमी ने इसे राजनीतिक लड़ाई करार दिया था।
उनकी टिप्पणियों के कारण मंगलवार को राज्य विधानमंडल के दोनों सदनों में हंगामा हुआ, जिसमें सत्ता पक्ष के सदस्यों ने उन्हें निलंबित करने और उन पर राजद्रोह का मामला दर्ज करने की मांग की।
आजमी ने मंगलवार को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि उनके बयानों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है।
उन्होंने कहा, “मैंने औरंगजेब के बारे में जो कुछ भी कहा है, उसका जिक्र इतिहासकारों और लेखकों ने किया है। मैंने शिवाजी महाराज, संभाजी महाराज या किसी भी राष्ट्रीय हस्ती के खिलाफ कोई अपमानजनक टिप्पणी नहीं की है। फिर भी, अगर मेरी टिप्पणी से किसी को ठेस पहुंची है, तो मैं अपने बयान और टिप्पणियां वापस लेता हूं।”
आजमी के कार्यालय द्वारा जारी एक वीडियो बयान में सपा विधायक ने कहा कि उन्होंने कुछ भी गलत नहीं कहा था लेकिन सदन की कार्यवाही जारी रह सके, इसलिए उन्होंने विधानसभा के बाहर की गई अपनी टिप्पणी को वापस ले लिया।
आजमी ने कहा, “फिर भी मुझे निलंबित कर दिया गया।”
उपमुख्यमंत्री और शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे ने मंगलवार को विधान परिषद और विधानसभा दोनों में आजमी पर निशाना साधा।
शिंदे ने कहा था, “आजमी जानबूझकर शिवाजी महाराज और संभाजी महाराज का अपमान कर रहे हैं। संभाजी महाराज की बहादुरी और औरंगजेब की क्रूरता लोगों के रोंगटे खड़े कर देगी।”
उन्होंने कहा था कि मुगल बादशाह ने न केवल हिंदुओं बल्कि अन्य धर्मों के लोगों को भी मारा।
शिंदे ने आजमी को “देशद्रोही” करार दिया और कहा कि उन्हें सदन में बैठने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि हाल ही में आई हिंदी फिल्म ‘छावा’ में संभाजी महाराज की बहादुरी और बलिदान को दर्शाया गया है।
शिंदे ने कहा, “देखिए संभाजी महाराज को 40 दिनों तक कितनी यातनाएं सहन करनी पड़ीं। औरंगजेब ने उनसे अपना धर्म बदलने को कहा था।”
आजमी की आलोचना करते हुए योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी से आजमी को उत्तर प्रदेश लाने को कहा। उन्होंने कहा, “उत्तर प्रदेश ऐसे लोगों से निपटना अच्छी तरह जानता है।”
आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश विधान परिषद में कहा, “आपको (सपा को) अपना रुख (अबू आजमी विवाद पर) तय करना होगा।” इसके बाद समाजवादी पार्टी के सदस्यों ने टिप्पणी करना शुरू कर दिया।
आदित्यनाथ ने कहा, “सपा का नेता, आपका विधायक.... उसे निकालो पार्टी से.... और उसे एक बार उत्तर प्रदेश भेज दीजिए, बाकी उपचार हम अपने आप करवा लेंगे।”
मुख्यमंत्री ने कहा, “जो व्यक्ति छत्रपति शिवाजी महाराज के परंपरागत गौरव की अनुभूति करने के बजाय लज्जा महसूस करे और औरंगजेब को अपना नायक मान रहा हो, क्या उसको भारत में रहने का अधिकार होना चाहिए?” उन्होंने समाजवादी पार्टी पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया।
मुख्यमंत्री ने कहा, “एक तरफ आप कुंभ को कोसते रहे और दूसरी तरफ औरंगजेब का महिमामंडन करते हैं। आखिर आपकी ऐसी कौन सी नस दबी हुई है कि आप लोग अपने उस विधायक पर नियंत्रण नहीं कर पा रहे हैं?”
आदित्यनाथ ने जोर देकर कहा कि समाजवादी पार्टी को सार्वजनिक रूप से इन बयानों की निंदा करनी चाहिए और आजमी को पार्टी से निष्कासित करना चाहिए।
उन्होंने कहा, “समाजवादी पार्टी उनसे अपना संबंध क्यों नहीं तोड़ लेती? सपा को तुरंत उनकी टिप्पणी की निंदा करनी चाहिए और उन्हें पार्टी से निकाल देना चाहिए।”
आदित्यनाथ ने कहा, “या तो उन्हें किसी सार्वजनिक सभा में बुलाकर स्पष्टीकरण मांगें या फिर उत्तर प्रदेश भेज दें। यहां ऐसे लोगों से निपटने में हमें ज्यादा समय नहीं लगता।” उन्होंने समाजवादी पार्टी पर भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत की अवहेलना करते हुए औरंगजेब का महिमामंडन करने का आरोप लगाया।
आदित्यनाथ ने कहा, “यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि समाजवादी पार्टी औरंगजेब को अपना आदर्श मानती है। यहां तक कि औरंगजेब के पिता शाहजहां ने भी अपनी आत्मकथा में लिखा था कि उनकी इच्छा थी कि किसी का भी ऐसा बदकिस्मत बेटा न हो।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज समाजवादी पार्टी डॉक्टर लोहिया के विचारों से कितनी दूर भाग चुकी है।
उन्होंने कहा, “कोई भी सभ्य मुसलमान अपने पुत्र का नाम औरंगजेब नहीं रखता क्योंकि उसे मालूम है कि यथा नाम तथा काम।”
शिवसेना की पुणे इकाई ने बुधवार को आजमी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया और कहा कि मुगल सम्राट औरंगजेब की प्रशंसा करने वाली उनकी टिप्पणी महाराष्ट्र के गौरव का अपमान है।
शिवसेना के नगर अध्यक्ष प्रमोद नाना भांगिरे ने पुणे में सरसबाग के निकट प्रदर्शन का नेतृत्व करते हुए कहा कि हिंदुओं के खिलाफ औरंगजेब के अत्याचारों और धर्म परिवर्तन कराने के उसके प्रयासों का महिमामंडन नहीं किया जा सकता तथा आजमी पर देशद्रोह का मामला दर्ज किया जाना चाहिए।
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