विदेश की खबरें | शून्य नहीं नकारात्मक उत्सर्जन को लक्षित कर रहे हैं कुछ देश
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on world at LatestLY हिन्दी. सीओपी28 जलवायु वार्ता में देश जब अपने हरित गैस उत्सर्जन को कम करने के तरीकों को लेकर उलझे दिख रहे हैं, डेनमार्क के नेतृत्व वाले देशों के समूह ने अंतिम लक्ष्य निर्धारित करने का निर्णय लिया है: यह लक्ष्य है वातावरण से वैश्विक तापमान वृद्धि (ग्लोबल वार्मिंग) के लिये जिम्मेदार कार्बन डाइऑक्साइड की उस मात्रा से कहीं अधिक को हटाना जिसका वे उत्सर्जन करते हैं।
सीओपी28 जलवायु वार्ता में देश जब अपने हरित गैस उत्सर्जन को कम करने के तरीकों को लेकर उलझे दिख रहे हैं, डेनमार्क के नेतृत्व वाले देशों के समूह ने अंतिम लक्ष्य निर्धारित करने का निर्णय लिया है: यह लक्ष्य है वातावरण से वैश्विक तापमान वृद्धि (ग्लोबल वार्मिंग) के लिये जिम्मेदार कार्बन डाइऑक्साइड की उस मात्रा से कहीं अधिक को हटाना जिसका वे उत्सर्जन करते हैं।
‘नकारात्मक उत्सर्जकों का समूह’ (द ग्रुप ऑफ निगेटिव इमीटर्स) रविवार को डेनमार्क, फिनलैंड और पनामा द्वारा दुबई में शुरू किया गया। इसका लक्ष्य उत्सर्जन में कमी, जंगलों की रक्षा और विस्तार तथा नई प्रौद्योगिकियों में निवेश करके उस लक्ष्य तक पहुंचना है।
पनामा पहले ही अपने विशाल जंगलों के साथ लक्ष्य तक पहुंच चुका है जो विशाल ‘कार्बन सिंक’ के रूप में कार्य करते हैं। फिनलैंड और डेनमार्क को उम्मीद है कि वे क्रमशः 2035 और 2045 तक इसे हासिल कर लेंगे।
फिनलैंड के पर्यावरण मंत्री काई माइक्कानेन ने चेताया, “कार्बन तटस्थ और उसके बाद कार्बन नकारात्मक होना एक बड़ी चुनौती है तथा हम अब तक वहां (लक्ष्य तक) नहीं पहुंचे हैं। लेकिन हम वास्तव में इसे लक्षित कर रहे हैं।”
समृद्ध नॉर्डिक देश ने त्रिस्तरीय रणनीति बनाई है। वह उत्सर्जन में कटौती करेगा, विशेष रूप से ऊर्जा क्षेत्र में, जंगलों का विस्तार करेगा और कार्बन संग्रहण और उसकी निष्कासन तकनीक में निवेश करेगा जो ग्रह को गर्म करने वाले उत्सर्जन को वायुमंडल तक पहुंचने से रोकती है और फिर इसे वहां पहुंचाती है जहां इसे स्थायी रूप से भूमिगत रूप से संग्रहीत किया जा सकता है।
पनामा और फिनलैंड के विपरीत, डेनमार्क में विशाल जंगल नहीं हैं और वह अपने लक्ष्य तक पहुंचने के लिए नई तकनीक को महत्वपूर्ण मानता है।
‘क्लाइमेट एक्शन नेटवर्क इंटरनेशनल’ के हरजीत सिंह का कहना है कि दुनिया को दोतरफा दृष्टिकोण की जरूरत है।
सिंह ने कहा, “विकसित देशों को अपने उत्सर्जन को घटाकर शुद्ध नकारात्मक स्तर पर लाना होगा। लेकिन साथ ही, विकासशील देशों को प्रौद्योगिकी और वित्त हस्तांतरित करें ताकि हम वास्तव में वहां उस प्रयास को बढ़ा सकें, क्योंकि वहीं उत्सर्जन बढ़ रहा है।”
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