चेन्नई, 25 नवंबर तमिलनाडु के राज्यपाल आर.एन. रवि ने शनिवार को कहा कि छुआछूत समेत मौजूदा सामाजिक भेदभाव के व्याप्त रहने के कारण संविधान में लोगों से किए गए वादे अब भी ‘‘दूर का सपना’’ बने हुए हैं।
इन वादों को कितना पूरा किया गया, इसकी जांच के लिए उन्होंने सामाजिक स्तर पर आकलन करने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि अदालतें एकमात्र ऐसी जगह नहीं हैं जहां न्यायशास्त्र विकसित होना चाहिए, बल्कि नागरिकों की भागीदारी वाली प्रक्रिया भी होनी चाहिए।
रवि ने कहा, ‘‘नागरिकों से किया गया वादा एक दूर का सपना बनकर रह जाएगा क्योंकि हमारे समाज में सामाजिक भेदभाव और छुआछूत व्याप्त है। हमें इस पर सोचना होगा और इसके लिए काम करना होगा।’’
यहां ‘तमिलनाडु डॉ. आंबेडकर विधि विश्वविद्यालय’ में ‘संविधान दिवस’ पर आयोजित एक दिवसीय कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि संविधान को केवल एक कानूनी दस्तावेज या केवल कानूनी विशेषाधिकार के रूप में सीमित नहीं किया जाना चाहिए।
विश्वविद्यालय के कुलाधिपति रवि ने कहा, ‘‘यह समय सामाजिक स्तर पर आकलन करके यह पता लगाने का है कि लोगों से किए गए वादे कितने पूरे हुए और यदि पूरे नहीं हुए, तो क्यों नहीं हुए।’’
उन्होंने कहा, ‘‘इससे असुरक्षा की भावना पैदा हुई। परिणामस्वरूप, एक अलग राज्य और मातृभूमि की मांग शुरू हो गई। पूर्वोत्तर इसका उदाहरण है।’’
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