देहरादून, 14 फरवरी उत्तराखंड सरकार भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं की मौजूदा जांच को उच्च न्यायालय के किसी न्यायाधीश की निगरानी में कराने के लिए मंगलवार को सहमत हो गई।
अभी विशेष जांच टीम (एसआईटी) और विशेष कार्य बल (एसटीएफ) द्वारा इसकी जांच की जा रही है।
अतिरिक्त मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि सरकार ने आंदोलनरत युवाओं की मांग मान ली है कि उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग और उत्तराखंड लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित परीक्षाओं में गड़बड़ी की जांच उच्च न्यायालय के किसी न्यायाधीश की निगरानी में कराई जाएगी।
सरकार ने प्रदर्शनकारी युवाओं की मांग पर उत्तराखंड लोक सेवा आयोग के परीक्षा नियंत्रक को भी हटा दिया है।
रतूड़ी ने कहा, "राज्य सरकार ने युवाओं द्वारा उठाए गए सभी मुद्दों को गंभीरता से लिया है और बातचीत के जरिए उन्हें स्वस्थ एवं सौहार्दपूर्ण तरीके से हल करने का प्रयास किया है। उनकी सबसे बड़ी मांग नकल विरोधी कानून को मजबूत करना था। राज्य सरकार ने हाल ही में एक अध्यादेश के जरिए देश का सबसे सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया है।’’
उन्होंने स्पष्ट किया कि नकल विरोधी कानून केवल राज्य सरकार द्वारा आयोजित प्रतियोगी परीक्षाओं पर ही लागू होगा और डिग्री कॉलेजों एवं स्कूलों द्वारा आयोजित परीक्षाओं पर लागू नहीं होगा।
उन्होंने कहा, ‘‘आंदोलन कर रहे युवाओं द्वारा राज्य सरकार के सामने लाए गए सभी मुद्दों का हल कर दिया गया है। राज्य सरकार युवाओं के हितों की रक्षा करना चाहती है और उन्हें गुमराह करने या उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ करने का प्रयास करने वालों से सख्ती से निपटना चाहती है।’’
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