देश की खबरें | कोरोना वायरस के साथ ‘एकल उपयोग’ प्लास्टिक ने की बड़ी वापसी: पर्यावरणविद
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देहरादून, छह जुलाई पर्यावरणविद अनूप नौटियाल ने सोमवार को कहा कि देश में कोरोना वायरस के साथ ‘एकल उपयोग’ प्लास्टिक ने भी बड़ी वापसी की है जो इस पर रोक लगाने की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल को एक बड़ा झटका है।
उन्होंने कहा कि देश में लंबे समय तक रहे लॉकडाउन की वजह से पर्यावरण पर अच्छा असर पड़ा और प्रदूषण के स्तर में गिरावट आई, लेकिन महामारी से लड़ने के लिए मास्क, दस्तानों, फेस शील्ड, पीपीई किट और सैनिटाइजर की बोतलों के बढ़ते इस्तेमाल ने नयी चिंताएं बढ़ा दी हैं।
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नौटियाल ने कहा, ‘‘कोई भी यह बात स्वीकार करेगा कि कोरोना वायरस संक्रमण की शुरुआत के बाद एकल उपयोग प्लास्टिक की बड़ी वापसी हुई है। स्वतंत्रता दिवस पर लालकिले की प्राचीर से इसपर (एकल उपयोग प्लास्टिक) रोक लगाने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान के बाद इसके खिलाफ शुरू हुआ अभियान लगभग मृतप्राय हो गया है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री के आह्वान के बाद ‘एकल उपयोग’ प्लास्टिक पर रोक के लिए देशभर में एक माहौल बन गया था। ‘स्वच्छता ही सेवा’ नाम से एक बड़ा अभियान शुरू हुआ था। अभियान का समर्थन करने के लिए देहरादून में लगभग एक लाख लोगों ने मानव श्रृंखला बनाई थी।’’
नौटियाल ने कहा कि लेकिन कोरोना वायरस के आने के साथ यह सब थम गया है क्योंकि महामारी से बचने के लिए मास्क, दस्ताने, फेस शील्ड और पीपीई किट पहनना जरूरी हो गया है।
उन्होंने कहा कि कोविड-19 की वजह से महीनों तक बंद रहीं अनेक गतिविधियां अब शुरू हो गई हैं। ‘एकल उपयोग’ प्लास्टिक के खिलाफ बने माहौल को ‘अनलॉक-2’ के दौरान पुनर्जीवित किए जाने की आवश्यकता है।
यह पूछे जाने पर कि जब मास्क, सैनिटाइजर, दस्तानों और पीपीई किट का इस्तेमाल जरूरी है तो यह कैसे हो सकता है, नौटियाल ने कहा कि मौजूदा वस्तुओं की जगह दोबारा इस्तेमाल हो सकने वाले मास्क और दस्ताने तथा अन्य चीजें बनाने के लिए सामूहिक प्रयास किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में महामारी के मद्देनजर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के दिशा-निर्देशों के अनुरूप जैव चिकित्सा कचरा निस्तारण के लिए एक संस्थागत तंत्र बनाया जाना चाहिए।
नौटियाल ने 2014 के लोकसभा चुनाव में टिहरी सीट से आम आदमी पार्टी के टिकट पर अपनी किस्मत आजमाई थी, लेकिन हार गए थे।
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