गोपेश्वर (उत्तराखंड), 23 जून ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से बदरीनाथ महायोजना के नाम पर बदरीनाथ धाम की मर्यादा और स्थापित परंपराओं को बर्बाद नहीं करने का आग्रह किया है ।
प्रधानमंत्री को इस संबंध में शुक्रवार को भेजे अपने पत्र की प्रति यहां मीडिया को जारी करते हुए शंकराचार्य ने कहा कि महायोजना के दूसरे चरण के तहत बदरीनाथ मंदिर के आसपास निर्माण कार्य शुरू हो गया है।
उन्होंने कहा कि मंदिर से कुछ ही मीटर की दूरी पर स्थित प्राचीन प्रह्लाद और कूर्म धाराओं के जल से धाम के मुख्य पुजारी के अभिषेक की परंपरा है जिसे अक्षुण्ण रखा जाना चाहिए । उन्होंने कहा, ‘‘निर्माण के नाम पर यहां से जुड़ी परंपराओं से छेड़छाड़ नहीं होनी चाहिए तथा उन्हें अक्षुण्ण रखा जाना चाहिए।’’
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने पत्र में जोशीमठ भूधंसाव से जुड़ी रिपोर्ट सार्वजनिक करने, हेलंग-मारवाड़ी बाइपास का निर्माण रोकने, धर्म के नाम पर हो रही घटनाओं पर रोक लगाने और जोशीमठ का नाम ज्योतिर्मठ करने का शासनादेश जारी करने की मांग भी प्रधानमंत्री से की है ।
गौरतलब है कि बदरीनाथ के स्थानीय लोग निर्माण कार्यों के चलते परिसर के समीप स्थित धार्मिक महत्व की पांच धाराओं में से दो (प्रहलाद और कूर्म धारा) के जलविहीन होने की शिकायत कर रहे हैं । उनका आरोप है कि निर्माण के लिए हो रहे खनन के कारण इनका पानी धरती के भीतर रिस गया है ।
माना जा रहा है कि इन्हीं आरोपों के परिप्रेक्ष्य में शंकराचार्य ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखा है।
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