फतेहगढ़ साहिब (पंजाब), 27 दिसम्बर गुरु गोविंद सिंह के दो पुत्रों की शहादत की याद में मनाया जाने वाला तीन दिवसीय वार्षिक शहीदी सभा रविवार को यहां धार्मिक कार्यक्रमों के साथ सम्पन्न हुआ।
यह कार्यक्रम सिखों के 10वें गुरु गोविंद सिंह के दो पुत्रों की शहादत की याद में मनाया जाता है जिन्हें मुगल शासक औरंगजेब के शासन के दौरान दीवार में ‘‘जिंदा चुनवा’’ दिया गया था।
ठंड के बावजूद शहीदी सभा के समापन के दिन हजारों श्रद्धालु गुरु गोबिंद सिंह के पुत्रों को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए एकत्रित हुए। शहीदी सभा को ‘जोर मेला’ के नाम से जाना जाता है। लोगों ने 10वें सिख गुरु की मां माता गुजरी को भी श्रद्धांजलि अर्पित की।
श्रद्धालुओं ने इस अवसर पर पंजाब के ऐतिहासिक गुरुद्वारा फतेहगढ़ साहिब और गुरुद्वारा ज्योति स्वरूप में मत्था टेका।
समापन समारोह के दौरान 'अरदास' के बाद गुरुद्वारा फतेहगढ़ साहिब से गुरुद्वारा ज्योति स्वरूप साहिब के लिए 'नगर कीर्तन' निकाला गया। नगर कीर्तन में कई श्रद्धालु शामिल हुए। गुरु ग्रंथ साहिब को ले जाने वाली पालकी को अच्छी तरह से सजाया गया था।
अकाल तख्त के जत्थेदार हरप्रीत सिंह ने गुरुद्वारा ज्योति स्वरूप में अरदास की। उन्होंने और एसजीपीसी अध्यक्ष जागीर कौर ने सिखों से गुरुओं की शिक्षा का पालन करने और नशीले पदार्थों के दुरुपयोग और कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ अभियान छेड़ने का आह्वान किया।
इससे पहले, आप के प्रदेश अध्यक्ष एवं सांसद भगवंत मान और पंजाब विधानसभा में विपक्ष के नेता, हरपाल सिंह चीमा ने भी शहीदी सभा के समापन के दिन श्रद्धांजलि अर्पित की।
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