जरुरी जानकारी | सेबी की समिति ने प्रवर्तन, वसूली व्यवस्था मजबूत करने के सुझाव दिये

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. सेबी की एक समिति ने बाजार नियामक के प्रवर्तन व्यवस्था को मजबूत बनाने और धन की हेराफेरी की वसूली प्रणाली में सुधार के लिये विभिन्न सुझाव दिये हैं। उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश अनिल दवे की अध्यक्षता वाली समिति ने चूकर्ताओं के मुनाफे के आकलन और निवेशकों को हुए नुकसान के आकलन के उपाय का भी प्रस्ताव किया है।

नयी दिल्ली, 16 जून सेबी की एक समिति ने बाजार नियामक के प्रवर्तन व्यवस्था को मजबूत बनाने और धन की हेराफेरी की वसूली प्रणाली में सुधार के लिये विभिन्न सुझाव दिये हैं। उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश अनिल दवे की अध्यक्षता वाली समिति ने चूकर्ताओं के मुनाफे के आकलन और निवेशकों को हुए नुकसान के आकलन के उपाय का भी प्रस्ताव किया है।

समिति ने ऋण शोधन, वसूली और प्रतिभूति संबंधी देश-विदेश के कानूनों की भी समीक्षा की। समिति ने ऋण शोधन एवं दिवाला संहिता में उपयुक्त बदलाव का सुझाव दिया ताकि इस कानून का उपयोग चूककर्ता आसान आश्रय के रूप में नहीं करे और निवेशकों के हितों की रक्षा हो।

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समिति ने हेराफेरी वाले धन की वसूली की मौजूदा व्यवस्था में भी सुधार की व्यापक सिफारिश की है।

भारती प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने इस पर सात जुलाई तक लोगों की प्रतिक्रिया मांगी है।

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कुल 424 पृष्ठ की रिपोर्ट में समिति ने सेबी के बिचौलिया नियमन (इंटरमीडिएरीज रेगुलेशन) में भी संशोधन की सिफारिश की है।

उसने सुझाव दिया है कि बाजार में बिचौलिया कारोबार करने वाली इकाइयों के पंजीकरण की दो स्तरीय जांच प्रक्रिया की एकल जांच प्रक्रिया अपनायी चाहिए। दो चरण में जांच से कोई बहुत फायदा नहीं है, बल्कि इससे जांच कार्यवाही पूरी करने में देरी ही होती है।

समिति ने यह भी कहा है कि व्यक्तिगत सुनवाई के लिये अवसर मनोनीत प्राधिकरण द्वारा दिया जाना चाहिए न कि प्रधिकरण के मनोनीत सदस्य द्वारा।

फिलहाल किसी प्राधिकरण के समक्ष व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर उसका मनोनीत सदस्य देता है। इस चरण में जांच कार्यवाही से दस्तावेजों की जांच /या पूछताछ से जुड़े मुद्दे बढ़ते हैं।

फिलहाल केवल चार पूर्णकालिक सदस्य हैं जो मनोनीत सदस्य के रूप में काम करते हैं। उनकी नियुक्ति केंद्र सरकार करती है।

इस प्रकार के कार्य पूर्णकालिक सदस्य (डब्लयूटीएम) के स्तर पर होने से जांच में समय लगता है क्योंकि दूसरे चरण की जांच इससे ऊपर की होती है।

दूसरी तरफ नियामक के पास अधिकरियों की समस्या नहीं है जिन्हें मनोनीति प्राधिकरण नियुक्त किया जा सकता है।

समिति ने जांच कार्यवाही के बारे में सुझाव दिया है कि व्यक्तिगत सुनवाई, दस्तावेजों की जांच, पूछताछ की मंजूरी मनोनीत प्राधिकरण द्वारा दी जानी चाहिए।

विस्तृत जांच-पड़ताल के बाद प्राधिकरण उपयुक्त कार्रवाई की सिफारिश को लेकर अपनी रिपोर्ट दे सकता है।

रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद मनोनीत सदस्य कारण बताओ नोटिस जारी कर सकते हैं।

धन की वसूली के संदर्भ में समिति ने कहा है कि मौजूदा कानून में ही चुनौतियां हैं। ऐसे में समिति ने अंतरिम कुर्की के संदर्भ में सुझाव दिये हैं।

समित ने कहा है कि सेबी को जांच से जुड़े मामले में किसी भी सौदे की राशि से अधिक रकम,धन या प्रतिभूति जब्त करने का अधिकार नहीं मिलना चाहिए।

फिलहाल कुर्की, कानून के किसी भी प्रावधान के उल्लंघन से संबद्ध वास्तविक राशि से जुड़ी होती है।

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