नयी दिल्ली, चार जुलाई राष्ट्रीय राजधानी स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में कई शोध परियोजनाओं में कार्यरत या पीएचडी कर रहे 1,100 से अधिक वैज्ञानिक इस शीर्ष चिकित्सा संस्थान की परियोजनाओं में नियुक्ति की अवधि सीमित करने के इसके प्रस्ताव के खिलाफ यहां प्रदर्शन कर रहे हैं।
सोसाइटी ऑफ यंग साइंटिस्ट्स (एसवाईएस) के अनुसार, प्रस्तावित दिशानिर्देश एक शोधार्थी की परियोजना की संख्या को दो तक सीमित करती है। आरोप है कि विभिन्न परियोजनाओं में कार्यरत शोध कर्मचारियों को चरणबद्ध तरीके से हटाने का एम्स प्रशासन का यह एक तरीका है।
एम्स निदेशक को लिखे एक पत्र में एसवाईएस ने कहा कि न केवल वैज्ञानिक क्षेत्र में, बल्कि इस खास संस्थान में अपने पेशेवर जीवन के कई वर्ष समर्पित करने का निर्णय लेने वाले शाधार्थियों को रोकने का यह अनुचित कदम है।
इसमें कहा गया है कि नीति निर्माताओं को ऐसा लगता है कि नये नियम लाने का वक्त आ गया है लेकिन इससे देश में विज्ञान के क्षेत्र में करियर बनाना पहले से अधिक कठिन हो जाएगा।
पत्र में कहा गया है, ‘‘हमारे संज्ञान में यह लाया गया है कि एम्स, नयी दिल्ली में किसी व्यक्ति की क्रमिक रूप से भागीदारी वाली परियोजनाओं की अधिकतम संख्या सीमित करने का नियम अगले कुछ दिनों में लाया जा सकता है। हम आपको इस बात से अवगत कराना जरूरी समझते हैं कि इस तरह का निर्णय संस्थान के शोधार्थियों के लिए सही नहीं होगा।’’
प्रस्तावित नियमों का शांतिपूर्वक विरोध कर रहे वैज्ञानिकों की योजना उनकी मांगें नहीं माने जाने पर आंदोलन तेज करने की है। उन्होंने मंगलवार को एक मार्च भी निकाला।
एसवाईएस ने यह भी मांग की कि इस सिलसिले में अंतिम नियम या नीतियां पारित करने से पहले महत्वपूर्ण बैठकों में उसके एक प्रतिनिधि को शामिल किया जाए।
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