नयी दिल्ली, 21 जून दिल्ली के उपराज्यपाल वी के सक्सेना ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) और उचित मूल्य की दुकानों के कामकाज के ‘सोशल ऑडिट’ के लिए नियम बनाने में आम आदमी पार्टी (आप) सरकार की "देरी" का उल्लेख किया है। यह जानकारी उपराज्यपाल कार्यालय के सूत्रों ने बुधवार को दी।
मामले से संबंधित एक फाइल पर एक टिप्पणी में, उपराज्यपाल ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से व्यक्तिगत रूप से जनहित की रक्षा के लिए नियमों की अधिसूचना की प्रक्रिया को शीघ्र पूरा करना सुनिश्चित करने के लिए कहा है।
इस पर प्रतिक्रिया जताते हुए, आप सरकार के सूत्रों ने कहा कि बेहतर होता कि उपराज्यपाल ‘‘चुनी हुई सरकार के खिलाफ दैनिक प्रेस विज्ञप्ति जारी करने और बाधाएं उत्पन्न करने के बजाय ‘‘कानून और व्यवस्था पर ध्यान केंद्रित करते, जो उनका प्राथमिक काम है।’’
उपराज्यपाल के कार्यालय के सूत्रों के अनुसार, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए), 2013 बनने के 10 साल बाद भी, दिल्ली में सार्वजनिक वितरण प्रणाली और उचित मूल्य की दुकानों के कामकाज का ‘‘सोशल आडिट’’ करने के लिए अभी तक नियम नहीं बनाए गए हैं।
एनएफएसए की धारा 40 की उप-धारा 2 के तहत ये नियम अनिवार्य सोशल आडिट का प्रावधान करते हैं ताकि अधिनियम और पीडीएस के तहत प्राप्त राशन के वितरण में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके।
केंद्रीय उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग के सचिव ने 1 जून को दिल्ली के मुख्य सचिव को एक पत्र भेजा था, जिसमें उल्लेख किया गया था कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली (जीएनसीटीडी) की सरकार ने सोशल ऑडिट के नियमों को अभी तक अधिसूचित नहीं किया है।
पत्र में कहा गया है कि मंत्रालय ने यह निर्णय लिया है कि यदि 30 जून तक जीएनसीटीडी द्वारा नियम नहीं बनाए गए और अधिसूचित नहीं किए गए तो केंद्रीय सहायता रोक दी जाएगी।
सूत्रों ने दावा किया कि इन घटनाक्रमों के बाद, दिल्ली सरकार ने छह जून को उपराज्यपाल को फाइल भेजी और नियमों को अधिसूचित करने के लिए मंजूरी मांगी।
सूत्रों के अनुसार उपराज्यपाल ने मसौदा नियमों को प्रकाशित करने और जनता के सुझावों और टिप्पणियों को आमंत्रित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
सूत्रों के अनुसार उपराज्यपाल ने यह भी निर्देश दिया है कि नियमों को अधिसूचित करने की प्रक्रिया जल्द से जल्द पूरी की जाए।
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